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भंग के नशे में चल रही क्या शिव सरकार ? : 200 रूपये माह में आंगनवाड़ी के लिए भवन कैसे उपलब्ध हो

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आक्रोशित कार्यकर्ताओ ने दिया ज्ञापन, केंद्र बंद होने की कगार पर

✍🏽सोमेश्वर पाटीदार-प्रधान संपादक👁
📞…9589123578

कुक्षी।सरकार की नीति व विसंगतियों की वजह से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओ को आये दिन समस्याओ का सामना करना पड़ रहा है। गत दिवस फिर धार जिले की कुक्षी महिला एवं बाल विकास विभाग परियोजना के अंतर्गत आने वाले आंगनवाड़ी केंद्रों की कार्यकर्ताओ ने कुक्षी एसडीएम कार्यालय पहुँच कर ज्ञापन सोपा और साथ ही जिला कार्यक्रम अधिकारी धार, कलेक्टर धार, संभाग आयुक्त इंदौर, मंत्री महिला एवं बाल विकास विभाग भोपाल को भी प्रेषित किया। जिसमें बताया गया कि, आंगनवाड़ी केंद्रों को भवन किराया हेतु अप्रेल 2016 से जून 2016 (मात्र 3 माह) तक 750 रूपये प्रतिमाह के अनुसार भुगतान किया गया था। जिसके बाद माह ऑक्टोम्बर 2016 से घटाकर 200 रूपये प्रतिमाह ही भवन किराया दिया जा रहा है। जबकि शहरी क्षेत्र में 200 रूपये माह में भवन उपलब्ध होना संभव ही नही। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता खुद राशि मिलाकर भवन किराया देती है या कही पर मकान मालिकों को किराया नही चूका पाने से खाली करने की नोबत आ रही। कुछ केंद्र बंद हो रहे है तो कुछ बन्द होने की कगार पर है। कही जगह खुले में मजबूरन बच्चो को बिठाना पड़ रहा। भवन का नियमानुसार फोटो व नक्शा सहित जानकारी पर्यवेक्षक व स्थानीय कार्यालय के माध्यम से वरिष्ठ कार्यालय तक पंहुचा दी गई। लेकिन आज दिनांक तक जिला कार्यक्रम अधिकारी की लापरवाही के चलते नवीन किराया निर्धारण नही होने से मात्र 200 रूपये ही किराया मिल रहा। आक्रोशित होकर एकत्रित हुई कार्यकर्ताओ ने जमकर नारे बाजी की व समस्या का निदान नही करने की स्थति में एक जुट होकर सभी केंद्र बन्द करने की बात कही है। शासन चाहती है कि, आंगनवाड़ी में झूले, वजन मशीन, पोषण कार्नर, उदिता कार्नर, स्तन पान कार्नर, रिकार्ड संधारण व पानी की व्यवस्था के साथ ही पोषण आहार रखने की भी व्यवस्था हो। तो सरकार ऐसी व्यवस्था तो 200 रूपये में कागज पर ही चल सकती है क्योंकि कार्यकर्त्ता कब तक जेब से आंगनवाड़ी संचालित करे। बच्चों की देख-रेख कुपोषण से मुक्ति और शिक्षा के प्रचार प्रसार सहित तमाम योजनाओं में करोड़ो रुपया बहाने वाली शिव सरकार को इधर भी ध्यान दे की जिम्मेदारों को इतना भी भान नही की 200 रूपये प्रतिमाह में तो बिजली बड़ी मुश्किल से मिलती है जहाँ केंद्र चलाते है। फिर इतनी ही राशि में एक माह तक भवन कैसे मिलें? नर्मदा सेवा यात्रा में करोडो रूपया बहाया तो जरा मुँह धोकर विचार तो करते की यह कैसे संभव है। विज्ञापन और नोटंकी बाजी के लिए हवा में करोडो रुपया फूंक देते हो और यहाँ जमीनी स्तर पर संचालित कार्यक्रम के लिए खाली हाथ दिखाते हो।

📞…ये जो बोले:-

किराया निर्धारण की फाइल पेंडिंग है जिला स्तर से निर्णय हुआ की इसका वेरिफिकेशन/सत्यापन एसडीएम साहब से करवाया जाए, अभी तक वेरिफिकेशन होकर जानकारी नही आई, इस संबंध में हम बार-बार एसडीएम साहब से बात कर चुके फिर कर लेते है…

-सुश्री नीलू भट्ट
जिला कार्यक्रम अधिकारी, धार

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