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एहसास-4

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हाल ही में गीतिका प्रतिष्ठित संयुक्त परिवार में ब्याही है। विवाह की रस्मों के दौरान ही दोनों परिवारों के रीति-रिवाजों और परम्पराओ का अंतर साफ़ दिखाई दे रहा था। और इसी कारण दोनों पक्षों में शादी-विवाह के दौरान सामान्यतः होने वाले छोटे-मोटे विवाद व्रहद रूप लेते प्रतीत हो रहे थे। गीतिका भी आसपास घट रही इन सब बातो से अनजान नही थी, मन ही मन घबरा रही थी, की कल से मायका छूट जायेगा, फिर वो ऐसे लोगो के बीच जीवनभर कैसे रहेगी ? वँहा तो उसका कोई भी अपना नही होगा।

फेरों के बीच मण्डप के आसपास बैठी वधु पक्ष की महिलाएं केवल एक ही बात कर रही थी, “दादा ने बिटिया का ब्याह इतनी धूमधाम से किया, कोई कसर नही छोड़ी, लेकिन लड़के वालो का व्यवहार देख कर लगता है, गीतिका कैसे एडजस्ट करेगी?” इस प्रकार की बातो से गीतिका की घबराहट बढ़ गई, यही सब सोच-सोच कर विदा होते हुए गई, जैसे ही ससुराल पहुँची बुआ सास ने स्वागत के साथ-साथ सख्ती से परिवार के रिवाजो को निभाने की सीख दे डाली। बड़ो से आशीर्वाद लेते समय उनके हाथ में कुछ भेंट रखना होती है, ये रिवाज उसके ससुराल में था, लेकिन गीतिका को तो पता ही नही था, जैसे ही उसने आशीर्वाद लेना शुरू किया, उसकी चाची सास ने उलाहनों की झड़ी लगा दी ओर तो ओर आसपास खड़ी अन्य सभी महिलाएं स्वर में स्वर मिलाने लगी, और गीतिका के मायके वालो और संस्कार पर प्रश्नचिन्ह लगाकर, पुरे खानदान को रीत-रिवाज से अनभिज्ञ घोषित कर दिया। माँ के कहे अनुसार गीतिका, सब कुछ चुपचाप सुन रही थी, लेकिन आँखों के आंसू पर काबू पाना उसके बस के बाहर था। इतने में उसकी नानी सास बोल पड़ी “कैसे खानदान से आई है, शुभ काम में रो कर अशुभ कर रही है, माँ ने कुछ भी सिखा कर नही भेजा तुझे”।

अब क्या अब तो गीतिका के सब्र का बाँध टूट रहा था, पर माँ के दिए संस्कार उसे कोई भी प्रतिक्रिया देने से रोके हुए थे। इतने में उसके कंधे पर एक हाथ आया और पीछे से आवाज आई “अरे आप सब लोग बारबार उसके खानदान और संस्कारो को क्यों कोस रहे हो ? अब ये हमारे घर की बहुरानी है, इसका मान-सम्मान ही हमारा अभिमान है” और इतना कहकर गीतिका को उसकी सास ने गले लगा लिया।

ये है गीतिका, जिसे “एहसास” हो रहा है की अभी इस प्रकार से हर बात पर उसके घर के संस्कारो को घसीटा जा रहा है, क्या भविष्य में वो यंहा एडजस्ट कर पायेगी ?” आप सबकी राय का इंतज़ार…

श्रीमती माला महेंद्र सिंह,
एम एस सी, एम बी ए, बी जे एम सी,
सामाजिक कार्यकर्ता,
94795555503
Vandematram0111@gmail.com

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