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छुने मत देना…

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छुने मत देना इन हवाओं को
अपनी जूल्फों को,  न बदन को और आँचल को भी नही।
वरना,ये जमाने मे तेरा जिक्र कर देगी ,
मुझे बााफिक्र कर देंगी।

छुने मत देना इस चाँदनी को
वरना चाँद तुझसे जमाल ले कर,
बन के सूरज धमाल कर देगा ।
जमाने मे तेरा जिक्र कर देगा।
मुझे बााफिक्र कर देगा  ।

यमुना किनारे बैठे हो?
छुना मत इसके श्यामल पानी को
ये तेरा धवल रंग ले लेगा ।
हो के धवल धमाल कर देगा ।
जमाने मे तेरा जिक्र कर देगा ।
मुझे बााफिक्र कर देगा  ।

तुम सिर्फ मेरे लिए हो,
नही चाहता किसी से तुम्हारा
कोई जिक्र करे ।
तुम बस जाओ दिल की गहराईयों मे,
जहाँ तुम्हे कोई न देख सके न छू सके  ।
न हवा, न चाँदनी, न तुम्हारा धवल
रंग देखकर द्वेष करती यमुना,
और यहाँ तक की मै भी नहीं ।

-पी. श्रीवास्तव

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