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एहसास-3

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भूमि एक अंतर्राष्ट्रीय संस्थान में कार्यरत है। अपना काम समय सीमा में और व्यवस्थित ढंग से करना ही उसकी पहचान है। मातृत्व अवकाश के बाद अब जब उसने पुनः कार्यालय जाना प्रारम्भ किया है, सशक्त महिला, सशक्त समाज का नारा बुलन्द करने वाले उसके साथी और कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी ( व्यावसायिक संस्थानों की सामाजिक जिम्मेदारी) के तहत उसके साथ कार्य करने वाले गैर सरकारी संगठन (एन जी ओ) की कर्ताधर्ता सबका एक ही स्वर की छोटे से बच्चे को छोड़कर काम कैसे करोगी ? वैसे तो भूमि आज भी घर-परिवार, कार्यस्थल की समस्त जिम्मेदारियो का निर्वहन पूर्ववत ही करने का पूर्ण प्रयास करती है, किंतु आजकल मानसिक रूप से विभिन्न संवेदनात्मक विषयो पर उलाहना देने वालो से बहुत परेशान है। और यही उसकी कार्यक्षमता को सतत् प्रभावित कर रहा है।

विवाह पश्चात दूसरे शहर में आने के कारण पुरानी सहेलियों से अब उसका ज्यादा सम्पर्क नही है, संस्थान में भी उसकी हमउम्र, मित्रवत् कोई महिला नही है, लिहाजा अपने मन की उथल-पुथल से स्वयं ही जुझ रही है। रोजाना अपने दैनंदिन कार्य से निवृत्त होकर, बच्चे की आवश्यक देख-रेख कर घर से निकलती है, कार्यालय में भी पुरे समय काम के साथ-साथ बच्चा घर पर कैसे होगा ? यही चिंता उसे सताती है, कार्यालयीन किसी भी कार्यशाला के तुरन्त बाद बिना भोजन लिए,घर की और भागती है, रातभर जाग कर अपने जिगर के टुकड़े को कहानियां, लोरियां सुना-सुना कर सुलाने का प्रयास करती है, स्वयं रात भर जागती है, लेकिन सुबह होते ही अपनी सम्पूर्ण ऊर्जा के साथ काम में जुट जाती है। लेकिन फिर भी जब घर के बाहर कदम रखती है, तो एक विचित्र दबाव महसूस करती है, उसे आसपास से उलाहने सुनाई देते है की बच्चा कैसा है ? किसके पास है ? तुम उसे छोड़ के कैसे रह लेती हो ? आदि-आदि।

भूमि ने घर पर बात किये बिना काम छोड़ने का मन बना लिया है। कार्यालय में अपना इस्तीफा देते हुए जब वो कोई ठोस कारण नही बता पाई, तो उसके वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “भूमि घरवाले तुम्हारा साथ देते है न ?” भूमि ने बिना देर किए कहा, बिल्कुल मेडम, वो हमेशा मेरे साथ है, इसीलिए में यंहा हूँ। “तो फिर इस्तीफा क्यों ?”

ये है भूमि जिसे आज “एहसास” है की जब उसका परिवार उसके साथ है तो उसे अन्य लोगो की बातो को सुनकर इतना जल्दी कोई भी कदम नही उठाना चाहिए। आप भी अपनी राय दीजिये की ” क्या आसपास के लोगो की बातो के कारण भूमि को काम से इस्तीफा देना चाहिए? ”

श्रीमती माला महेंद्र सिंह,
एम एस सी, एम बी ए, बी जे एम सी
सामाजिक कार्यकर्ता,
9479555503
Vandematram0111@gmail,com

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