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एहसास-2

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निकिता विवाह के पूर्व संगीत महाविद्यालय में प्राध्यापिका थी। विवाह के पश्चात ससुराल आई, शहर बदला, लोग बदले, प्रयास किया, किन्तु कंही अपने हुनर को सार्थक करने का स्थान नही मिल पाया। धीरे-धीरे पारिवारिक जिम्मेदारियो में व्यस्त हो गई, और संगीत जैसे विस्मृत हो गया। बच्चों के बाद व्यस्तता और बढ़ गई। एक दिन बिटिया के स्कूल में एक कार्यक्रम के दौरान निकिता को अपनी संगीत सहपाठी मिली। वो कार्यक्रम की अतिथी के रूप में वँहा आई थी। दोनों इतने वर्षो बाद अचानक एक-दूसरे को देखकर हल्की सी मुस्कान का आदान-प्रदान ही कर पाए, क्योकि निकिता मंच के सामने की कुर्सी पर और उसकी सहेली मंजुलता मंच पर बैठी थी।

कार्यक्रम के दौरान निकिता पुरानी स्मर्तियों के साथ हो ली और सोचने लगी की शिक्षको के अनुसार कॉलेज में वो मंजुलता से कई गुना श्रेष्ठ थी, और आज वो अपने आपको ठगा सा महसूस कर रही थी। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद दोनों बड़ी आत्मीयता से मिली। मंजुलता ने बातों-बातों में बताया की उसे भी कंही कोई नौकरी नही मिली, सो उसने पतिदेव के सहयोग से संगीत क्लासेस खोल ली और आज वो नामी “भारतीय संगीत अकादमी” की संचालिका है।

बस अब क्या था निकिता को भी लगा की वह भी पुनः संगीत को जीवंत कर सकती है। घर पहुँचकर उसने परिवार वालो से अपने मन की बात साझा की, सहज ही सब तैयार हो गए, और निकिता का मनोबल बढ़ाते हुए घर में ही एक कक्ष संगीत क्लासेस हेतु सजाने-संवारने हेतु तत्पर हो गए। पतिदेव ने सभी की उत्सुकता और अतिउत्साह के मध्य गंभीरता से कहा “निकिता को संगीत छोड़े काफी लंबा समय हो गया, इसलिए उसे किसी न किसी संस्थान में पुनः जा कर अपने आपको इस हेतु तैयार करने की आवश्यता है”। परिवार के सभी सदस्य इस हेतु एक स्वर हो गए।

लेकिन निकिता, अपने आपको अब इतने लम्बे अंतराल के बाद पुनः विधार्थी के रूप में सोचकर सहज महसूस नही कर रही थी। इस कारण उसने तुरन्त कहा “मुझे नही खोलना कोई संगीत-वंगीत की क्लासेस। मै कुछ ओर काम कर लूँगी”।

ये है निकिता, जिसे आज “एहसास” है की उसने अपने हुनर को अनचाहे ही विस्मृत कर दिया। परिजन उसके हुनर को फिर उसी रूप में जीवंत करने हेतु, उसे समझाने का प्रयास कर ही रहे है। आप सब भी अपनी राय दीजिये “क्या निकिता को अपने हुनर को पुनः जिंदा करने हेतु सार्थक प्रयास करना चाहिए ?”

श्रीमती माला महेंद्र सिंह,
एम एस सी, एम बी ए, बी जे एम सी
सामाजिक कार्यकर्ता,
9479555503
Vandematram0111@gmail.com

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