Home मध्यप्रदेश गधों पर सियासत, यहाँ गधे विलूप्त

गधों पर सियासत, यहाँ गधे विलूप्त

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भोपाल। देश भर में जहां गधों पर सियासत जारी है वहीं मध्यप्रदेश में गधे विलुप्त होने के कगार पर हैं। यह खुलासा प्रदेश में पशु गणना के दौरान हुआ है। दरअसल 1997 की पशु गणना में गधों की संख्या 49249 थी लेकिन 2014 में इनकी संख्या मात्र 14916 रह गयी। प्रदेश में गधों की कम हो रही संख्या से पूर्व आईएफएस आजाद सिंह डाबास भी चिन्तित हैं। उनका कहना है कि गधा प्रदेश में ग्रामीण परिवहन का एक बेहद उपयोगी साधन है और ऐसी ही हालत रही तो गधा विलुप्त होने के कगार पर पहुंच जायेगा।

चीन में गधों की मांग इतनी बढ़ गई है इसे दूसरे देशों से आयात किया जा रहा है। दरअसल चीन में गधों की खाल से जिलाटीन नाम की एक प्रोडेक्ट बनाई जाती है, जिसका इस्तेमाल एक मशहूर दवा ‘इजाओं’ में इस्तेमाल होता है जो इंसोमेनिया जैसे मर्ज के लिए कारगर है। इस दवाई का नाम TCM है। इसे बनाने में गधे की खाल से निकलने वाली एक वस्तू का इस्तेमाल होता है। चीन में इस दवाई की भारी मांग है। चीन इस मांग को देखते हुए हर साल करीब 5 हजार टन TCM बनाता है। इस दवाई का इस्तेमाल चीन में सर्दी जुकाम, एनिमिया और अनिद्रा जैसी बीमारियों के लिए होता है इसके साथ-साथ इसका इस्तेमाल फेसक्रीम और एंटी एडिंग के तौर पर होता है।साथ ही जिलेटिन का इस्तेमाल स्वास्थ्यवर्धक और कामोत्तेजना बढ़ाने वाली दवाओं और एंटी एजिंग क्रीम बनाने में किया जाता है। चीन ये दवा बनाकर दुनिया भर में निर्यात करता है और अच्छा खासा मुनाफा कमाता है

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