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4 वर्षीय मासूम के साथ गैंग रेप पर नेता,सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मुँह में क्या ठूंस रखा

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रंजना,उमंग,हनी,बाला और जयस कहा गुम गये
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✍🏽सोमेश्वर पाटीदार-जनादेश पर नज़र👁
📞…9589123578

इंदौर/कुक्षी।धिक्कार… धिक्कार… धिक्कार… है… उन हवसखोर दरिंदों और राजनितिक स्वार्थ सिद्धि करने वाले नोटंकीबाज नेता,सामाजिक कार्यकर्ताओं पर… मानवता को तार…तार… करने और सुन कर ही रोंगटे खड़े करने वाली घटना को अंजाम दिया धार जिले के डही में मन में शैतानियत पाल कर 4 दुष्कर्मी व सहयोगियों ने। डही में 4 वर्षीय मासूम के साथ उसके मोहल्ले में ही रहने वाले चिंटू पिता सुरेश ने 3 अन्य साथियों के साथ मिलकर दुष्कर्म किया। दिनांक 15 फरवरी सुबह 10 बजे जब बच्ची खेलने गई और 2 बजे लौटकर घर आई। जिसके बाद शाम 6 बजे बहुत दर्द होने से कराह उठी बच्ची से उसकी माँ ने पूछा तो बात सामने आई कि,चिंटू ने उसके साथ दुष्कर्म किया और वो भी दूसरे आरोपियों ने पकड़ रखा था। माँ ने पति को बताया और पुलिस थाना पहुँचे रिपोर्ट दर्ज करवाने जिसके बाद लोगो की भीड़ बढ़ती गई। बताया जा रहा 9 बजे लगी भीड़ 2 बजे तक डटी रही। और कुक्षी से एसडीओपी प्रियंका डुडवे के डही पहुँचने के बाद रात्रि 12:34 बजे मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने अपराध भादवि की धारा-376(2)(1), 376(डी) व 3/4 पास्को एक्ट-2012 का पंजीबद्ध किया। आरोपियों को पकड़ लिया गया न्यायालय में पेश किया जाना है। थाना प्रभारी सुभाष सुल्या पर भी सवाल खड़ा होता है कि, मासूम के साथ हुए दुष्कर्म पर दुष्कर्मियों पर प्रकरण दर्ज करने में घंटों क्यों लग गए? क्या मामले को दबाने में थे सुल्या? प्रकरण दर्ज करवाने में इतनी संख्या में लोगो की उपस्थति होगी तभी दर्ज होगा क्या? वरिष्ठ अधिकारी थाना प्रभारी सुल्या के करमों पर भी गौर करे। साथ ही सवाल करता हूँ जो भूतिया कांड में अपराधियों के संरक्षण में उतर कर राजनितिक नोटंकी करते हुए पुलिस पर दुष्कर्म का बेबुनियाद आरोप लगाने वाले उन नेताओं से की अब इस मासूम के साथ हुई घटना पर क्या मुँह में ठूंस रखा और कोनसे बिल में छुप गए। वह किसी भी जाति,धर्म की हो 4 वर्षीय बच्ची के साथ अन्याय नही हुआ क्या? गरीब आदिवासी भाइयों की चिंता ही है तो कई भूखे-प्यासे और बीमारी,गरीबी,कर्ज से लड़ रहे है जरा उनके साथ भी तो खड़े हो जाओ। आदिवासी के उत्थान के लिए चल रही योजनाओं में डाका कोंन डालता है? पिछली घटनाओं में फोटो छपवाने के बाद कभी उन पीड़ित परिवारों की और पीछे मुड़ कर देखा, जिनके नाम पर राजनीतिक रोटी सेक रहे थे? इन हरकतों को जातिगत रूप से दुर्भावना फैलाकर एकता को खंडित करने का दुस्साहस भर ही कहा जा सकता है। गरीब आदिवासीयों को सक्षम कर मुख्य धारा में ही लाना है तो शिक्षा,स्वास्थ्य और जनकल्याणकारी योजना का सही हाथो में लाभ दिलाकर सेवा करें।

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