Home HOME चलते-चलते: अपनी माटी से अपने नोनिहलो को परिचित कराये

चलते-चलते: अपनी माटी से अपने नोनिहलो को परिचित कराये

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ग्रामीण क्षेत्र में प्रवास के दौरान एक वरिष्ठ कार्यकर्ता के निवास पर जाना हुआ। परिवार के सभी सदस्यों से भेंट के पश्चात, सहज ही मैने परिवार के बच्चों के विषय में पूछा, उनकी माता जी ने कहा “अरे दीदी बच्चे यंहा नही रहते, वो तो इंदौर रहकर पढ़ाई कर रहे है। बेचारे घर ही नही आ पाते, अब बस इस साल के बाद नौकरी के लिए दोनों बैंगलोर और पुणे जाने वाले है। वो उनकी पढ़ाई लिखाई करे और सेट हो जाये बस भगवान से यही प्राथना है।” मैने कहा अरे वाह बहुत अच्छी बात है भाभी, लेकिन भैया तो बता रहे थे आपकी बहुत खेती है यंहा, फिर यह काम कौन देखेगा ?

वो बोली “अरे दीदी खेती-किसानी, गाँव में अभाव का जीवन, इस धूल-मिटटी में रहना,आजकल के बच्चों के बस की बात कँहा? हमने तो बच्चों को शुरू से ही बाहर ही रखा, अब वो अपने पैरो पर खड़े हो जाये बस, हमको उनसे और कुछ नही चाहिए।”

हम अपनी आने वाली पीढ़ी को क्या दे रहे है, यह विचारणीय प्रश्न है। मेरा इस बात से कोई विरोधाभास नही है की बच्चे अच्छी शिक्षा ग्रहण कर अपने पैरो पर खड़े हो, लेकिन जिस माटी में जन्म लिया, जँहा घर-परिवार, कुटुंब है, जिस स्थान से उनकी पहचान है, उसके प्रति भी तो उनके कुछ दायित्व है, और उनका निर्वहन भली प्रकार हो सके, यह हमारी जिम्मेदारी है।आज हम सभी को सोचने की जरूरत है की आखिर बिना किसी व्यवहारिक कठनाई के, हम अपनी और से कोई भी प्रयास किये बिना आज की पीढ़ी के विषय में स्वयं ही धारणा क्यों बना लेते है ? हमारे पूर्वजो ने जिस प्रकार हमे अपनी माटी, संस्कार, परंपरा, आचार-विचार, व्यवहार से परिचित कराया, वैसे प्रयास आज हमारी और से क्यों नही हो पा रहे ?

आइये किसी भी रूप में,कोई भी धारणा बनाने के पूर्व आज की पीढ़ी को अपने संस्कारो से साक्षात्कार तो कराए, उन्हें उनके महत्व का एहसास तो क्रय, उन्हें उनके कर्तव्यों से परिचय तो कराए, उन्हें भी अपना अभूतपूर्व सहेजने का मौका तो दे, सहयोग करे, विश्वास रखे आज की पीढ़ी भी हमारी ही तरह अपनी माटी से जुड़े रहना चाहती है, किसी भी रूप में अपनी प्राथमिकताओं से समझौता नही करना चाहती। केवल हमारे प्रयासों और मनमस्तिष्क से बुनी धारणा हमे उनसे वो सब करने को न कह रही है और न हि इन्हें इस हेतु प्रोत्साहित और जागरूक कर रही है। आइये हम तो शुरुआत करे..

श्रीमती माला महेंद्र सिंह,
एम एस सी, एम बी ए, बी जे एम सी,
सामाजिक कार्यकर्ता,
94795-55503,
Vandematram0111@gmail.com

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