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उम्मीद-5… एसडीएम कुक्षी: वन-वे और यातायात व्यवस्था को दिखा रहे ठेंगा, नॉनस्टॉप बसों की भी दादागिरी

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यातायात का पाठ पढ़ाने के लिए स्कूली बच्चे बधाई के पात्र
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✍🏽सोमेश्वर पाटीदार-जनादेश पर नज़र👁
📞…9589123578

इंदौर/कुक्षी।आजकल यातायात व्यवस्थाएं उम्मीदों को तार-तार करने पर उतारू है…वर्ष 2016 के अंतिम सप्ताह में ही रिशव गुप्ता एसडीएम (आईएएस) ने बीआरसी भवन में एक बैठक ली, जिसमे ट्रांसपोर्टर,बस संचालक,स्कूल संचालक व नगर के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। बड़ी उम्मीदों के साथ कुक्षी नगर में यातायात के दबाव से मुक्ति के लिए वन-वे की व्यवस्था करने की बात गुप्ता ने की। इसकी सुनी उसकी सुनी…सुनी या अनसुनी जैसे भी वन-वे पर मोहर लग कर 1 जनवरी 2017 नव वर्ष से व्यवस्था लागू करने का निर्णय सुनाया। यातायात का पाठ पढ़ाने के लिए विभिन्न स्कूलों के छात्रों को दिनभर चोराहे पर खड़ा रखा गया और छात्रों द्वारा लगभग 1 माह तक ईमानदारी से सराहनीय सेवाएं दी गई। देर से समझ में आने के बाद…फिर बात आई सुरक्षा समिति व सामाजिक संगठन के लोगो से सेवा लेने की, इनकी सेवा लेने के लिए एसडीएम द्वारा ली जाने वाली पहली मीटिंग में मामला नही जमा तो दूसरी बार रखी गई, जिसमे 4 घंटे के लिए एक व्यक्ति को सेवा देनी थी, वो भी प्रतिदिन नही संभवतः 8 से 15 दिन में नंबर आता। पहले दिन तो कुछ लोगो ने ईमानदारी से सेवाएं दी दूसरे दिन मामला कमजोर होते गया और अब तो चोराहे पर यातायात का पाठ पढ़ाने के लिए एक भी सामाजिक कार्यकर्ता नही खड़ा दिखाई दे रहा। वह व्हाट्सअप वीर भी नही दिख रहे जो ग्रुपो में पहले खूब ज्ञान बघारते थे और कुछ फोटो छपने तक ही थे। सवाल यह है कि, अगर यह सब उम्मीदों पर खरे नही उतर रहे तो चालानी कार्यवाही कर जेब ढीली करवाओ राजस्व वृद्धि भी होगी और समझ में भी जल्दी आयेगी नियम तोड़ने वालों को। और दूसरी बात यह भी है कि, ये ग्रामीण क्षेत्र है इंदौर,भोपाल,दिल्ली जैसे बड़े शहरो में बरसो से यह यातायात की व्यवस्था चल रही है तो, जरा बताये की वहाँ कोनसे चालान नही बन रहे? अब तक तो समझ जाना चाहिए था और ट्रैफिक पुलिस की भी आवश्यकता वहाँ नही होनी चाहिए थी। अगर वहाँ नही सुधरे हालात तो इस गांव में कैसे उम्मीद कर सकते हो? इसके अलावा जरा उन नॉनस्टॉप बसों से भी तो उम्मीद कीजिये जो नियम विरुद्ध जगह-जगह स्टॉप कर सवारी अलीराजपुर-कुक्षी-इंदौर और कुछ गुजरात जाने में बिठाती है और सवारियों से बत्तमीजी करते है। साथ ही आपस में बस वाले जमकर विवाद कर शांति भंग करने का दुस्साहस करते है। इनकी मनमानी के कई पीड़ित गौर से देखोगे तो नज़र आएंगे। और सुनो बसों में ओवरलोडिंग का खेल भी बहुत हो रहा जो बड़ी दुर्घटना को न्योता देकर मोत को चिड़ा रहे है। और ये सभी वाहन शहर से ही गुजरते है। वन-वे के अलावा इन पर भी गौर करो…करे या करवाओ भी तो चेहरा देख कर तिलक न लगे निष्पक्ष कार्यवाही ही करे…यही उम्मीद मुझे और कुक्षी को भी। इस प्रकार की कई उम्मीदें में और जनता आपसे करती है रिशव गुप्ता एसडीएम कुक्षी। उम्मीद करता हूँ कब,किससे, क्या उम्मीद की जाये यह उम्मीद करने से पहले सोच लेना चाहिए फिर उम्मीद करना चाहिए। क्योंकि उम्मीद करे तो फिर उस पर खरा भी उतरे…और हमे उम्मीद करने का अधिकार है यह आपके हाथो में संविधान की बुक लेकर चलते हो उसमे देख लेना ओके…ऐसी ही उम्मीद के साथ फिर मिलेंगे नई उम्मीद के साथ…

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