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एक किसान का आमरण अंशन: सत्ता के दलालों की खोल रहा पोल

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मनावर। आज दिनांक 10 फ़रवरी 2017 से म.प्र. के धार जिले की मनावर तहसील के ग्राम पटवार(मिर्जापुर) के किसान श्री आत्माराम परशुराम पाटीदार अपने खेत पर ही आमरण अंशन पर बैठ रहे है।
कारण ,म प्र सरकार द्वारा फसल बीमा की राशि नहीं देने के कारण।

श्री आत्मराम पाटीदार केंसर के मरीज है।
उन्होंने अपने खेत में 40 बीघा ने कपास की फसल लगाई ,किन्तु 40 बीघा में 40 क्विंटल भी कपास नहीं हुआ।अर्थात जितना बीज लगाया उतना भी नहीं आया ,ऊपर से दवाई खाद मजदूरी बिनाई आदि तो अलग ही है।इन सब के लिए उन्होंने सहकारी सोसाइटी से तो ऋण लिया ही,साथ में बाकानेर SBI से गांव के कुछ मित्रो और रिश्तेदारो से भी कर्ज इस उम्मीद में लिया की अच्छी फसल आई तो पूरा कर्ज उतार कर अच्छी कमाई भी करूँगा।
जब कपास की फसल फेल हो गई तो उन्होंने जो फसल बीमा लिया था उससे भरपाई के लिए स्थानीय शासकीय कर्मचारी ,और कार्यालयों में तहसीलदार ,SDM मनावर ,कलेक्टर धार ,मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान और यहाँ तक की प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तक गुहार लगाई ,किन्तु प्रधानमंत्री कार्यालय से सिर्फ एक पत्र के जवाब को छोड़ कर, आज तक किसी भी अधिकारी कर्मचारी ने कोई कार्यवाही की न उन्हें कोई आश्वासन दिया।
तंग आकर 8 फ़रवरी 17 को उन्होंने फैसला किया कि वे 10 फ़रवरी 17 को सुबह 10:30 बजे से अपने खेत पर ही आमरण अंशन करेंगे।
जब तक उन्हें फसल बीमें के मुआवजे की पूरी राशि नहीं मिलती वे अपने अंशन को खत्म नहीं करेंगे।

आस पास के कई गांवों के किसान बंधू उन्हें समर्थन दे रहे है।

श्री आत्मराम पाटीदार जी का कहना है कि केंद्र में या राज्य में चाहे किसी भी पार्टी की सरकार बनती है, किसानों की समस्याओं पर किसी भी सरकार या किसी भी राजनीतिक पार्टी ने गोर से ध्यान नहीं दिया है।

उनका कहना है जब तक किसान एक नहीं होंगे कोई भी सरकार किसानों का भला नहीं करेगी।
देश में मुठ्ठी भर व्यापारी है ,किंतु जब वो ठान लेते है तो किसी भी सरकार को झूका देते है,किन्तु 70% आबादी किसानो की है पर सभी सरकारों ने सिर्फ वोट के लिए ही उनका स्तेमाल किया है।
फसल के बीज खरीदने से लेकर फसल उगा कर बेचने तक हर स्तर पर, व्यापारी सरकारी कर्मचारी, किसान का शोषण करते है।

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