Home HOME कोषाध्‍यक्ष पद से हटाए गए पन्‍नीरसेलवम, पार्टी से निकाले जाने की कवायद...

कोषाध्‍यक्ष पद से हटाए गए पन्‍नीरसेलवम, पार्टी से निकाले जाने की कवायद शुरू

2369
133
SHARE

चेन्नई। तमिलनाडु के कार्यकारी मुख्यमंत्री पन्नीरसेलवम के शशिकला पर यूटर्न लेने और खुली बगावत करने के बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आने की पूरी संभावना बन गई है। उनके इस रुख से खफा एआईएडीएमके महासचिव शशिकला ने पन्नीरसेलवम की पोर्टी कोषाध्यक्ष पद से छुट्टी कर दी है। उनकी जगह डिंडिगल सी.श्रीनिवासन को नया कोषाध्यक्ष नियुक्त किया है। दोनों खेमे अब विधायकों को अपने पक्ष में लामबंद करने में जुट गए हैं।

शशिकला के खिलाफ बगावती तेवर दिखाने वाले पन्नीरसेलवम को पार्टी से निकाले जाने की भी पूरी संभावना है। इसका जिक्र खुद शशिकला ने ही किया है। दरअसल, पन्नीरसेलवम के रुख से सक्ते में आई शशिकला ने मंगलवार रात को पार्टी नेताओं की पोज गार्डन पर बैठक बुलाई थी। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यकारी मुख्यमंत्री यह सब डीएमके के इशारे पर कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह मानती है कि उन्हें पार्टी से निकाल देना चाहिए। उनका कहना था कि वह मानती हैं कि पार्टी के सभी नेता भी यही मानते हैं।

एक अंग्रेजी अखबार की खबर के मुताबिक तेजी से उभर रहे इस राजनीतिक संकट को हल करने के मकसद से शशिकला ने एआईएडीएमके विधायकों की बुधवार को एक बैठक बुलाई है। वहीं अखबार ने सूत्रों के हवाले से यह भी लिखा है कि इस संकट के समाधान के लिए गवर्नर, शशिकला और पन्नीरसेल्वम से अलग-अलग बातचीत करके मामले का हल निकालने की कोशिश की जाएगी।

गौरतलब है कि, पन्नीरसेलवम ने आरोप लगाया है कि उन्हें सीएम पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया था। हालांकि अन्नाद्रमुक नेता एवं लोकसभा के डेप्युटी स्पीकर एम थम्बीदुरई ने पन्नीरसेलवम के इस दावे को खारिज किया है। उनका कहना है कि पार्टी प्रमुख वीके शशिकला ही राज्य की नई मुख्यमंत्री होंगी क्योंकि सभी विधायक उनके साथ हैं। अन्नाद्रमुक नेता ने कहा कि इस मुद्दे पर सभी विधायक एकजुट हैं।

तमिलनाडु में इस बदले हुए घटनाक्रम के बीच अब सभी की नजरें राज्यपाल विद्यासागर राव पर टिक गई हैं। राज्यपाल के सामने अब चार विकल्प माने जा रहे हैं। इसमें से पहला यह है कि वह फिलहाल पन्नीरसेल्वम को ही सीएम बने रहने के लिए कह सकते हैं। दूसरा वह शशिकला को न्योता देकर बहुमत साबित करने को कह सकते हैं। तीसरा विकल्प विधानसभा को भंग करने का माना जा रहा है, जिसकी उम्मीद कम है। राज्यपाल चौथे विकल्प के रूप में राज्य में फिलहाल राष्ट्रपति शासन लगा सकते हैं।

LEAVE A REPLY