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आत्म मंथन से ही मनुष्य को परमात्मा की प्राप्ति होती है – पं.शर्मा

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● स्व.पेमाजी पटेल नवादपुरा की स्मृति मे हो रहा आयोजन।
● संगीतमय कथा का श्रवण करने उमड़ रहै है भक्तजन
इफराज कुरैशी द्वारा । कुक्षी के समिप ग्राम नवादपुरा मे 4 फरवरी से स्व.पेमाजी पटेल की स्मृति मे आयोजित हुई भागवत कथा महोत्सव के तिसरे दिन कथावाचक ज्योतिषाचार्य पंडित श्री सुभाष जी शर्मा दत्तीगाव के मुखारबिंद से प्रवाहित हो रही संगीतमय श्री मद भागवत कथा मे भक्तजनो को रसपान कराते हुए कथा के चौथे दिन उन्होंने समुद्र मंथन कथा का वर्णन करते हुए कहा कि समुद्र मंथन से तो एक बार में केवल चौदह रत्न मिले थे पर आत्ममंथन से तो मनुष्य को परमात्मा की प्राप्ति होती है। जो हरि का दास है वह सुख दुख से परे होकर हमेशा परमानंद की स्थिति में रहता है। श्रीमद भागवत कथा के महत्व को समझाते हुए व समुद्र मंथन की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि सागर मंथन में सबसे पहले हलाहल विष निकला जिसे भगवान भोले शंकर को पीना पड़ा। जब भी समाज के विकास के लिए कोई सार्थक पहल होती है तो उसके साथ तमाम विसंगतियां इसी हलाहल विष की तरह ही सामने आती है और तब भगवान शंकर की तरह उन विसंगतियों का समन करने के लिए किसी न किसी महापुरुष को नीलकंठ बनना पढ़ता है। इस संगीतमय कथा का श्रवण करने सैलाब की तरह भक्त पधार रहै है ।अन्त मे कमल पटेल के साथ जनपद पंचायत कुक्षी के पुर्व अध्यक्ष राम सिंह एस्के , उनकी पत्नी किरण एस्के व यजमान पटेल परिवार ने विधी विधान से भागवत की आरती के साथ तिसरे दिन की कथा का समापन किया ।

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