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सकारात्मक सोमवार: महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता

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आज दोपहर महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता सभी के मध्य चर्चा का विषय रहा। ये विषय नया नही है, कई बार प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से इस बारे में हम सभी बिना किसी पूर्व योजना के बात करते ही है। सामन्यतः होने वाली गम्भीर चर्चा की बीच किसी ने कहा “अरे भाई इस आधुनिक समय में किसी भी रूप में महिला, पुरुषों से पीछे नही है। न कमाने में, न उड़ाने में, बस इतना जरूर है की समय के साथ कदमताल कर आर्थिक सक्षमता की ओर, अब हम और गहराई से सोचने लगे है।”

बहुत ही सामान्य प्रयोगिक है, आज जब हम सभी अपने कार्यो से निवर्त्त हो तो घर की ओर जाते समय, बाजार की चाकाचौँध के बाद गली-मोहल्लों में पहुँचने पर हर पांचवे घर के बाहर ब्यूटी पार्लर, महेंदी,पेंटिंग,सिलाई, कढ़ाई आदि सिखाने, घर जैसा अचार, पापड़, बड़ी इत्यादि मिलने के बोर्ड लगे दिखते है। बहुत ख़ुशी की बात है की जो महिलाये बाहर जाकर काम करने में सहज नही है वो घर पर ही रहकर, घर की समस्त जिम्मेदारियो के निर्वहन के पश्चात, घर की आर्थिक स्थिति सुद्रढ़ करने के लिए अपनी क्षमता और योग्यता के अनुसार काम कर रही है।

भौतिकवादी समय में परिवार की आर्थिक उन्नति के लिए,बढ़ाया गया एक छोटा-सा कदम भी कितना महत्वपूर्ण हो सकता है, ये परिवार में अचानक आने वाले मौको पर ही पता लगता है। आप सभी सक्षम और समर्थ है, पहला कदम आप बढाइये, सब बेशक आपका साथ देंगे। अपने परिवार के लिए आपका उठाया हुआ पहला कदम, कितना महत्वपूर्ण है, ये शायद आप भी नही जानती। आइये अपने गृह लक्षमी रूप को सार्थक करें..

श्रीमती माला महेंद्रसिंह

एमएससी,एमबीए,बीजेएमसी

सामाजिक कार्यकर्ता,इन्दौर(म.प्र)

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