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क्या मेरा कसूर ये था कि मैं अल्पमत की सरकार के लिए दो निर्दलीय विधायक लेकर गया ?

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#बात_बदनावर_के_सम्मान_की_है
क्या मेरा कसूर ये था कि मैं अल्पमत की सरकार के लिए दो निर्दलीय विधायक लेकर गया? या फिर मैं किसी पूर्व मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री या किसी मंत्री का बेटा नहीं हूं।
आखिर ये वंशवाद कब तक प्रतिभाओं और जन भावनाओं जा अपमान करेगा?
मेरे लिए मंत्री पद या विधायिका मायने नहीं रखती।मायने रखती है बदनावर के 84499 मतदाताओं की भावना,उनकी आकांक्षा..!!
जनाकांक्षाओं के अपमान की शर्त पर मैं ऐसी विधायिकी को लाख बार ठुकरा सकता हूँ..!!लेकिन अब बदनावर की आवाज को आलाकमान तक पहुंचना मेरी जवाबदेही है।
मेरे खून में दोगलाई नहीं है।
राजा बख्तावरसिंहजी और प्रेमसिंहजी का वंशज हूँ।मैं आपकी लड़ाई लड़ने के लिए कमर कस चुका हूँ…!!
आपमें से किसी को इस्तीफा देने की जरूरत नहीं है।देना होगा तो मैं दूँगा…!!
लोकसभा के साथ फिर उपचुनाव लड़ लेंगे।
क्योंकि रणभूमि में पहला वार सेनापति सहता है और मैं अपनी सेना की लड़ाई लड़ने के लिए अपनी कुर्बानी देने को तैयार हूँ।मेरे पिता का रक्त भी यहीं बहा था और मैं भी आपके बीच ही जियूँगा और यहीं मरूंगा।
विधानसभा परिवार के समस्त मतदाताओं का पुनःश्च कोटी-कोटी आभार व्यक्त करता हूँ..!! जय हिंद..! जय भारत…!!
सदैव आपका-
#राजवर्धनसिंह_दत्तीगांव

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