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*उम्मीद-01 एसडीएम कूक्षी : घर बुलाकर बेइज्जती करना तो कोई एसडीएम अंशुल गुप्ता से सीखे… _*_जब किसी का मौन चुभ जाए तो सम्भल जाना चाहिए… और मिठाई अपने चहेतों को खिला… मै तो आईना दिखाऊंगा _आईएएस की गर्मी अपने ही पास रखना, इधर भी तापमान कम नही… विधिवत उतारा कर दिया जाता है… _*_मै तो गायत्री सरोवर व ड्रेनेज लाईन के लिए मौन बैठा रहूंगा, पर कार्य पूर्ण होने तक स्थानीय प्रशासन व नगर परिषद को मौन नही बैठने दूंगा

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✍🏽 सोमेश्वर पाटीदार- प्रधान संपादक👁
📞…9589123578

*ठंड गिरने लगी और कानों में*
*इतना कह गयी कि,*
*गर्मी किसी की भी हमेशा के*
*लिए नही रहती…*
इसीलिए शुद्ध रूप से बोल देता हूं एसडीएम अंशुल गुप्ता… आईएएस की गर्मी अपने ही पास रखो, क्योंकि, गर्मी इधर भी कम नही है। साथ ही किताब से बाहर आकर व्यावहारिक ज्ञान भी बढ़ाओ… बड़े दिनों से उम्मीद नही लिख रहे थे पर तुमने मजबूर कर दिया। फिर भी तुम्हारे लिए पहली उम्मीद संतुलित ही लिख रहा हूँ। मेरे मौन की परीक्षा मत लेना, मौन चुभ रहा हो तो सम्भल जाएं क्योंकि कलम बोलती है, कहा से बोलेंगी और आवाज़ कहा से निकलेगी पता नही चलेगा।
मुद्दे कि बात करते हुए बताना चाहूंगा मित्रों… गायत्री मन्दिर सरोवर सौंदर्यीकरण व ड्रेनेज लाईन अधूरे निर्माण को पूर्ण करवाने के लिए शासन-प्रशासन को कई बार लिखा। उसके बाद 6 दिन अनशन किया, अभी 2 घण्टे का प्रतिदिन कार्य पूर्ण होने तक धरना जारी है। प्रशासन द्वारा 6 माह में कार्य पूर्ण करने की शर्त पर उपवास समाप्त किया था। 1 माह गुजर चुका और कार्य बंद पड़ा है। इससे पूर्व इसी बात को लेकर एसडीएम अंशुल गुप्ता को पर्सनल मेसेज कर स्थिति से अवगत करवाकर कार्य को प्राथमिकता से पूर्ण करवाने का अनुरोध किया था। एसडीएम ने मुझे आवास पर आने हेतु मेसेज किया। जब आवास पर जाता हूं तो मेरा विजिटिंग कार्ड कर्मचारी के द्वारा भेजता हूँ, फिर कर्मचारी से पूछवाते कुछ काम है क्या ? मै कहता हूं उन्होंने बुलाया था। फिर अंदर जाकर बैठता हूँ। वो आते है और कहते कहिये मेने सुनने को बुलाया ? जब मै लिखकर बात कहता हूं तो एसडीएम बोलते आपका मौन वृत चल रहा क्या, तो में ऐसे बात नही करूँगा। गायत्री सरोवर की बात पर बोले काम खड़े पर नही होगा। फिर कहते चाय लो… मिठाई लो… सामने रखवाकर। मै हाथ जोड़कर वापस… घर बुलाकर अपमानित करने के बाद यह ज्ञानचंद बोलते है, घर आये मेहमान कुछ तो लीजिए। अरे वाह रे संस्कारवान… बेइज्जती करने के बाद ? जो जहां से सुनता हो सुन लेना रे भैय्या… इधर खोने के लिए कुछ नही… पूर्णरूप से जनहित को समर्पित, खुद की व ईश्वर की नज़र से न गिरूं मुझे इसकी चिंता जरूर है। नगर की आस्था के केंद्र मां गायत्री मन्दिर सरोवर व ड्रेनेज लाईन के कार्य को पूर्ण करवाने के संकल्प को लेकर किये जा रहे शांतिपूर्ण आंदोलन का रूप बदलने पर नगर की जनता को मजबूर न करें। संस्कारों की बात करने वालो माँ गायत्री मलमूत्र पर बैठी है यह क्यों तुम्हारी खोपड़ी में नहीं उतर रहा ? 1 माह गुजर गया 5 माह बाद फिर बोलोगे लोकसभा चुनाव की आचार संहिता, जबकि चल रहे कार्य मे आचार संहिता से कोई बाधा नही। सीएमओ लिखित में दे चुके कि, योजना की राशि आ चुकी फिर विलम्ब क्यों ? 6 माह में कार्य पूर्ण करने के वादे में अब 5 माह से भी कम समय शेष रह गया है, और मै नगर के सहयोगियों के साथ रात्रि 8 से 10 बजे तक 2 घण्टे सांकेतिक धरने पर बैठता हूँ। कुक्षी के तुम वरिष्ठ अधिकारी हो इसलिए बड़ी उम्मीद के साथ अनुरोधपूर्वक लिख रहा हूँ कि, उक्त कार्य को प्राथमिकतापूर्वक समयावधि में पूर्ण करवा दें। सुना है कि, बत्तमीजी के साथ जेल भेजने की भी धमकी दी जाती है, तो मै बोल देता हूं जितनी धाराएं हो लगाओ… जितने झूठे प्रकरण बनते हो बनाओ… पर इतना और याद दिला दूं कि, बीते दिनों में कुछ संकेत मिले हो तो सम्भल जाना… इस बार इतना ही, फिर मिलेंगे अगली उम्मीद के साथ… जय हो…

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