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*दिव्यांशी बाल गृह के 3 बच्चों का अपहरण जमुनादेवी पब्लिक स्कूल से होना संदेहास्पद : कुक्षी पुलिस ने किया अज्ञात के विरुद्ध अपहरण का मामला दर्ज, जांच जारी… “बाल गृह व स्कूल पर रंगा-बिल्ला और ऊपर से अतिउत्तम का सानिध्य फिर तो जमीन पर पांव ही कहा…” जिम्मेदारों की आंखे खुली या सत्ता की धाक में कायदे कानून ख़ाक कर बचाने लगे संचालकों की नाक…

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✍🏽सोमेश्वर पाटीदार-प्रधान संपादक👁
*📞9589123578*

*✒खड़ी कलम…*
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*धंधेबाज़…* यह शब्द आजकल बहुत ही ताकतवर हो गया है। इसके आते ही न कोई दल, न जाति, न सम्प्रदाय सिर्फ और सिर्फ धंधेबाजी का तगड़ा गठजोड़ ही होता है। और ख़ासकर राजनीति में तो आजकल कौन कब किस दल के कपड़े पापी धंधे के लिए पहन ले जरा भी भरोसा नही। मुद्दे की बात पर आते हुए हम बता रहे धार जिले के कुक्षी के समीपस्थ ग्राम सिलकुआ से बच्चों के अपहरण होने का मामला।

ग्राम सिलकुआ में स्व. छितु किराड़े स्मृति आदि. बहु. विकास संस्था द्वारा संचालित दिव्यांशी बाल गृह के अधीक्षक द्वारा पुलिस थाना कुक्षी को सूचना दी गई कि, दिनांक: 1 सितम्बर 2018 को 3 बालको को स्कूल भेजा और वही से कहीं चले गए जिनकी तलाश की पर नही मिले। किशन पिता रमेश उम्र 16 वर्ष, राजा पिता रमेश उम्र 12 वर्ष, दिनेश पिता ध्यानसिंह उम्र 14 वर्ष इन तीनों बालकों को कोई अज्ञात बहला फुसलाकर ले भागा है। जिस पर पुलिस ने कार्यवाही करते हुए दिनांक 15 सितम्बर 2018 को प्रकरण क्रमांक: 485 धारा: 363 में अज्ञात के विरुद्ध दर्ज करते हुए जांच शुरू कर दी।

बड़ा सवाल यह भी है कि, घटना के 16 दिनों बाद पुलिस थाने पर प्रकरण पंजीबद्ध करवाया जाता है। और सूचना कर्ता द्वारा देरी का कारण आसपास तलाश करने पर नही मिलना बताया जाता है। लापरवाही व घोर अनियमितता का इससे बड़ा उदाहरण इस मामले में क्या हो सकता है ? जबकि, बाल गृह व स्कूल संचालक बड़े ही पहुँचवान है। बताया जाता है बाल गृह संचालन समिति में पूर्व मंत्राणी रंजना बघेल का भांजा जयदीप पटेल है जो स्वयं भी डही जनपद पंचायत का अध्यक्ष है। वहीं जमुनादेवी पब्लिक स्कूल का संचालक इनसे भी बड़ी पहुँच रखने वाला जावेद कुरेशी है। क्योंकि यह स्व. जमुनादेवी के रहते तक तो उनका खास बना रहा। किन्तु उनके चले जाने के बाद ही सत्ता का साथ पाने के लिए इसका हाथ फूल वालो के साथ हो गया था। रंजना, विजय शाह जैसे कई नेताओं के अलावा उत्तम का भरपूर सानिध्य भी प्राप्त है।

अब इतनी बड़ी ये हस्तिया और इतनी बड़ी लापरवाही कई सवालों को जन्म देती है। सवाल तो महिला एवं बाल विकास विभाग पर भी उठते है कि, मान्यता देकर फुर्सत पा ली और पीछे मुड़कर देखा भी नही कि, जिसे मान्यता दी वह क्या गुल खिला रहे ? वहीं दूसरी और बाल गृह व स्कूल प्रबंधन का तो इतना कुछ होने के बाद भी महज़ इतना बताया जा रहा कि, लड़के स्वयं भाग गए, अपहरण नही हुआ है। बाल गृह में अभी 19 बच्चे होना बताया जा रहा है। जबकि, 50 लोगों की सीट है। देखना यह है कि, किसी मामले में तो छोटी-छोटी बातों पर लोड लेने वाला प्रशासन इस बड़े मामले में कोई ठोस कार्यवाही करता है या संचालकों के आगे बोना साबित होकर लीपापोती… विभिन्न मुद्दों पर अपडेट रहने के लिए पढ़ते रहिये… *”जनादेश पर नज़र”*

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