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बाग के दाग के रूप में उभरा सौदागर पटवारी तिवारी पुनः कब्जा पाने के लिए लगा रहा जुगाड़ : शिवराज के आगमन पर भी ज्ञापन देकर रोना गाना करे धार में ज्ञापन देने वाले भाजपाई *-* शिवराज को इसके कारनामें व नेता, अधिकारी इस दबंग पटवारी के आगे बोने साबित हो रहे यह भी बताए “बाग में 2 दशक के कार्यकाल को खंगाल कर देखे तो उजागर होगा, कहां शासकीय जमीन मरी और कहां जमीर…”

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✍🏽सोमेश्वर पाटीदार-प्रधान संपादक👁

*📞9589123578*

*✒खड़ी कलम…*
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ये लो मित्रों पेश है धार जिले के बाग के पटवारी रहे विश्वनाथ तिवारी पर शब्दों के तीर से भरी दूसरी किश्त… जिसका कई लोगो को इंतजार था। साथ ही पहली किस्त पढ़ कर छटपटाये तिवारी से भी सीधे-सीधे कहना चाहता हूँ कि, इधर-उधर हाथ पांव मारकर मेरे से सम्पर्क करने या समझाईस देने दिलाने का दुस्साहस मत करो। क्योंकि, विकल्प एक ही है, गर शब्दों के तीर से तुम्हें जख्म लगा है, तो खुद के गिरेबां में झांककर 2 दशकीय कार्यकाल को भी उठाकर देख ले कि, कब, कहा, कैसे, किसे तुमने जख्म दिए ? दूसरा कोई विकल्प नही, देश-प्रदेश की राजधानी से कुछ भी कारनामें करवा लो किंतु खबर के मामले में इधर कलम खड़ी है और खड़ी ही रहेगी, तुम्हारी हराम की हरियाली हवा से आड़ी नही होगी। सुधार पर विचार करने के बजाय बाग में पुनः आने के लिए फड़फड़ाना मतलब दिए गए जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा ही कुछ करने जा रहे हो।

कुक्षी के नवागत एसडीएम महेश बड़ोले का भी ध्यानाकर्षण करवाना चाहूंगा कि, पूर्व एसडीएम द्वारा दबंगता से पटवारी के विरुद्ध जांच प्रारम्भ की थी, जिसका निराकरण भी उसी दबंगता से हो ऐसी जनता की अपेक्षा है। क्योंकि बताया जा रहा बाग में अतिक्रमण के नाम पर वसूली कर शासन को बड़े दाग देकर पूर्व में खूब कारनामें करने के बाद पुनः बाग पर कब्जा जमाने के लिए पटवारी तिवारी उतावला हुए जा रहा है।
अब यहां आने के लिए फड़फड़ायेगा भी क्यों नही दाड़ में खून जो लगा।

विश्वस्त सूत्रों के अनुसार आवासीय कालोनी के नाम भू माफियाओं से अवैध धन लेकर, ऐसी कालोनियों को अमलीजामा पहनाया गया कि,उन कालोनियों ने नियमो विरुद्ध लोगों को प्लाट तो बेच दिये, पटवारी तिवारी ने उन प्लाटो की रजिस्ट्री आवासीय नही कर खसरे खाते मे करवा दी?
एक संघ नेता ने आदिवासी की जमीन खरीदकर उसी के नाम से कालोनी बनाकर आदिवासी कर्मचारियों को महंगे भाव पर बिना टाउन प्लानिंग की स्वीकृति से प्लाटो की रजिस्ट्री करवाकर शासन को राजस्व की हानि पहुचाकर भू माफियाओं को लाभ दिलवाया? और इसके तबादले मे संरक्षण पाया/ इन अवैध कालोनियों की भी जाँच कि जावे तो कई खाकी व सफेदपोश बेनकाब होगे ?

वरिष्ठ अधिकारी- कर्मचारी पर तो शासन-प्रशासन के नियम व आदेश तत्काल लागू होते है। लेकिन दबंग पटवारी विश्वनाथ के आगे सभी नियम व आदेश कचरे के ढेर में… लगभग 20 वर्षों तक एक ही स्थान पर जमे रहने के बाद तबादला होता है जिस पर तिवारी के आका कुंडली मारकर बैठ जाते है। जबकि, सत्ताधारी दल के नेता-कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालय पर इसकी बाग वापसी का विरोध कर ज्ञापन सौप चुके है, फिर भी तिवारी की तिकड़म के आगे बोने साबित हो रहे। और इसीलिए अब मुख्यमंत्री शिवराज के बाग आने पर भी एक ज्ञापन सौपकर खुली बात कह देना चाहिए कि, जन आशीर्वाद चाहिए और चुनाव में कार्यकर्ताओं से काम चाहिए तो पटवारी तिवारी बाग में नही होगा और नही तो चुनाव के काम भी निष्ठावान कार्यकर्ताओ के बजाय तिवारी से ही ले लेना।

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