Home इंदौर अपनी औकात में रहो बालू सेठ… तू तो क्या तेरे दादा मोदी...

अपनी औकात में रहो बालू सेठ… तू तो क्या तेरे दादा मोदी भी चौथे खंबे पर टिका : पाटीदारों को साधने के लिए जाते-जाते मिली कुर्सी पर बैठ मत खुजलाओं ना-लायक “और अंध भक्त कान खोलकर सुन ले… वाणी से मौन हूँ… पर कलम बोलती है…”

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✍🏽सोमेश्वर पाटीदार-प्रधान संपादक👁

*📞9589123578*

*✒खड़ी कलम…*
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*ये लो…* अपनी औकात दिखा ही दी म.प्र. शासन के राज्यमंत्री बालकृष्ण पाटीदार ने टुच्चापन दिखाकर। भाजपा की सरकार में जातिगत वोट बैंक का गुणा- भाग के चलते पाटीदारों को साधने के बदौलत मिली जाते-जाते राज्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे कुछ माह ही बीते की बालकृष्ण को बर्राठी चढ़ गई। मुद्दे की बात पर आए तो गत दिवस खरगोन विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के एक प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की विशेषताएं बताते हुए राज्यमंत्री बालकृष्ण पाटीदार ने बोला कि, हम पेपर बाचे पेपर दे जाए वो और फोकट के 5 रुपये खर्च होते है। उसमें दो शब्द भी नही लिखे वो सच्चा, ऐसे झूठे-मुटे पेपर को पढ़ने से क्या फायदा… ओर ये पेपर वाले ना, नेताओं को डराते है, नही तो हम तुम्हारे खिलाफ छाप देंगे, लाओ.. इनको जितना भी दो पेट नही भरता है। लेकिन अपन वैसे नेता नही, में तो कहता हूं मेरे पास खुद का माउथ मीडिया है। जो कहना है सीधा कहता हूं। इस तरह से सम्बोधित कर भाजपा कार्यकर्ताओं को ये कैसा प्रशिक्षण दे रहा था मंत्री ? लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ पत्रकारिता का मूल्यांकन करने से पहले खुद के गिरेबां में झांक कर देख… कि, अब तक का राजनीतिक सफर तय करने में तू और कब कहा कितना गिरा होगा। पूत के पांव पालने में तो तभी नज़र आ गए थे जब राज्यमंत्री बनाये जाने पर कुक्षी तहसील के ग्राम निम्बोल में पाटीदार समाज द्वारा सम्मान समारोह आयोजित किया गया जिसमें बालकृष्ण के मुखारविंद से शिवराज के बोल निकले थे। तब भी मंचासीन व कार्यक्रम में पधारे विभिन्न दल के लोग व गैर-राजनीतिक लोगो की मौजूदगी में यह ना-लायक समाज की बात करने के बजाय शिवराज़ की आरती उतारने में लीन था। छोटी डिब्बी में भरी मानसिकता को खुली करके यह दिमाग से निकाल देना कि, खुद की योग्यता से राज्यमंत्री बना हो। वो तो मंदसौर गोली कांड व हार्दिक आंदोलन के मंथन से घबराई शिव सरकार ने फूलती सांसों को ऑक्सीजन देने के लिए तेरे जैसे ना-लायक को कैप्सूल के रूप में मंत्रिमंडल में आखरी-आखरी ले लिया। नही तो वही घूमते रहते मंत्रियों के आगे-पीछे पट्ठे बनकर… अरे वैसे भी कोनसा सुधार हो गया। गरिमामयी पद जरूर मिला पर, खोपड़ी में तो कचरा ही भरा। तो अपने कचरे को साफ करके सभी इंद्रियों को खोलकर सुन लेना रे बालकृष्ण… चौथे स्तम्भ का मूल्यांकन करना तो भूल ही जा, कहीं तेरा मूल्यांकन कर दिया तो मूल भी नही बचेगा ब्याज तो दूर की बात है। और तू तो क्या पर तेरा दादा नरेंद्र मोदी भी चौथे खम्भे पर टीका है। और जिस दिन चौथा खम्भा बिगड़ गया उस दिन सत्ता में न तुम रहोंगे, न मामा, न दादा… इसलिए अपनी औकात में ही रहने में फायदा है। और खासकर आदर्श, मूल्यों, संस्कारों की खदान वाली भाजपा की थान से बालकृष्ण जैसे नमूने निकले तो समझ सकते है कि, अब भाजपा किस मोड़ पर है…

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