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किसानों के नाम पर सरकारी धन की बर्बादी कर भाजपाइयों की मौज-मस्ती : कुक्षी नगर परिषद में पहुँचे मुकाम की शपथ से पहले विदेश भ्रमण कार्यक्रम तय “पूत के पांव पालने में आये नज़र… नगर परिषद से विकास का पहिया जाएगा किस डगर…”

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✍🏽सोमेश्वर पाटीदार-प्रधान संपादक👁
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*✒खड़ी कलम…*
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*सरकार…* नित नए कीर्तिमान रचे ही जा रही है। खेती को लाभ का धंधा बनाने के चक्कर में प्रदेश की भाजपा सरकार ने किसानों को लाभान्वित करना तो दूर उल्टे इनको बेवकूफ बनाने का ही धंधा खोल रखा है। अब देखो ना… हद ही तो हो रही “मुख्यमंत्री किसान विदेश यात्रा योजना” में किसानों के चयन में।

इस योजना के तहत विदेशों में प्रदेश के किसानों को भेजकर खेती की उन्नत तकनीक सीखने का अवसर देना है। ताकि, एग्रीकल्चर, हार्टिकल्चर, पशुपालन व डेयरी विकास व फूड प्रोसेसिंग सहित अन्य आधुनिक तकनीक सिख सके। किंतु दुर्भाग्य है प्रदेश के किसानों का कि, हर मामले में बढ़-चढ़कर जनता के जमा शासकीय धन को हजम करने में अव्वल रहने वाले नेताओं ने इस योजना को भी नही बक्शा।

योजना के तहत इस वर्ष मार्च में किसानों को ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, न्यूजीलैंड, स्पेन, ब्राजील, फ्रांस, ऐस्ट्रोडर्म व तेलअवीव सहित विदेश के अन्य स्थानों पर भेजा जा रहा है। जिसमें किसान तो सिर्फ नाम मात्र है। इनके पीछे विदेशी फिजाओं में मस्ती छानेंगे स्वयं विधायक, पूर्व विधायक व इन सत्ताधारियों के रिश्तेदार… जो सरकार की मंशा पर सवालिया निशान खड़ा कर रही है।

बात करें धार जिले की तो यहाँ से मनावर विधायक रंजना बघेल के पतिदेव व कुक्षी से पूर्व विधायक रहे मुकाम सिंह किराड़े जो नगर परिषद कुक्षी के अध्यक्ष निर्वाचित होने के सप्ताह भर ही गुजरा और शपथ तो अभी ली भी नही है। उससे पूर्व ही “पूत के पांव पालने में नज़र आने लगे” क्योंकि यह नेताजी भी किसानों की इस योजना के नाम पर विदेश भ्रमण पर जाएंगे।

अब देखना यह है कि, कुक्षी नगर की जनता ने नगर सरकार में तो किराड़े को मुकाम दे दिया। लेकिन, मुक़ामसिंह किराड़े खरे उतरेंगे या जनता को जुकाम देंगे। क्योंकि, अभी शपथ से पूर्व ही किसान योजना के नाम पर विदेश भ्रमण होने का तय हुआ है। तो सोचना तो पड़ेगा ही, पर नगर के लिए चिंता का विषय भी है।

*ख़ास नज़र:-*प्राप्त जानकारी के अनुसार योजना के तहत किसानों का चयन करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों ने मन मारकर सत्ताधारियों के दबाव में गैर-किसानों का चयन किया। और योग्य किसानों की हो गई उपेक्षा।

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