Home इंदौर धार जिले में भाजपा का सूपड़ा साफ़ होने के बाद अंदर खाने...

धार जिले में भाजपा का सूपड़ा साफ़ होने के बाद अंदर खाने उठापठक की सुगबुगाहट : भाजपा जिलाध्यक्ष पर उंगली उठते ही सोशल मीडिया पर मर्यादाएं लांघते भाजपाई # मनावर से खिसकती जमीन को लेकर मायूस रंजना बघेल को विकल्प की चिंता “कुक्षी से एक मात्र अब भाजपा के वीरेंद्र ही दे सकते है कांग्रेस के सुरेंद्र को टक्कर”

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✍🏽सोमेश्वर पाटीदार-प्रधान संपादक👁
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*✒खड़ी कलम…*
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*संस्कारवान…* की नोटंकी करने वाले भाजपाई धार जिले में नगरीय निकाय चुनाव में हार पहनने के बाद सोशल मीडिया पर खुलकर कीचड़ उछालने में लग गए। 3-रमेश (रमेश मेंदोला- स्व. रमेश डूंगरवाल-रमेश धाड़ीवाल) के दम पर कुक्षी व डही सीट पर कांग्रेस से छीनकर कब्जा जमाने में भाजपाई सफल हुए। लेकिन, जिले की भाजपा के कब्जे वाली नगर पालिकायें व परिषद को भी विक्रम वर्मा के घमंड व जिलाध्यक्ष राज बर्फा के निष्प्रभाव के आगे खोना पड़ा।

जिलेभर में भाजपा के सूपड़ा साफ़ होने के चलते जैसे ही, जिलाध्यक्ष मीडिया के टारगेट में आये और गुटबाजी के साथ ही बागियों को बिठाने में नाकाम रहे। कहीं न कहीं अस्वीकार्यता की झलक भी दिखाई देने लगी। जिसका दुष्परिणाम भाजपा को विपरीत परिणाम आने पर भुगतना पड़ा। इसी बात को लेकर जिलाध्यक्ष के बदलने की खबरें चल पड़ी। फिर क्या था विश्वस्त सूत्रों के अनुसार मिर्ची लगने पर संस्कारवान भाजपा के पदाधिकारियों ने मौखिक में या सोशल मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप चालू कर दिए। वो भी इनके संस्कारों के विपरीत हलकट जैसे- गाड़ी को कोई खिंच रहा तो नीचे चलने वाला न समझे कि…. फिर क्या ऐसी कमेंटस पर गर्म चर्चा चलती रही। बात निकली तो संभागीय संगठन तक पहुँचने की खबर बताई जा रही। जहां से दो शब्द फटकार स्वरूप भी सम्बन्धितों को प्राप्त हुए।

भाजपा के प्रदेश नेतृत्व को आगामी विधानसभा व लोकसभा को दृष्टिगत रखते हुए निश्चित रूप से जिले की कमान अन्य वरिष्ठ नेताओं में से किसी को सौपने पर विचार करना चाहिए। साथ ही मनावर, सरदारपुर, धार को भी खोने से बचने हेतु गहन मंथन कर सही निर्णय पर पहुँचना पड़ेगा।

मनावर से नगर पालिका हारने के बाद सूत्रों से ज्ञात हुआ कि, विधायक रंजना बघेल भी मायूस होकर नई जमीन की तलाश में है। आजकल कुक्षी में भी सक्रियता दिखाई देने लगी है। लेकिन, यहाँ तो कांग्रेस से भाजपा में लाये गए जिला पंचायत सदस्य वीरेंद्र बघेल ही भाजपा के लिए उपयुक्त दिखाई पड़ रहे। लगभग भाजपा में आने के लिए जिम्मेदारों ने हो सकता जुबान भी दे रखी हो। अब जुबान चुनाव आते तक कायम रहती है तो भाजपा फायदे में, और बंडल में कमंडल होता है तो, दीनदयाल ही जाने कुक्षी में भाजपा का क्या होगा।

वैसे सरकार में दबंगता से क्षेत्र की बात रखने में रंजना एक बड़ा नाम है। लेकिन, इस बार मनावर होकर विधानसभा में पहुँचना भी मुश्किल है। गंधवानी से जरूर रंजना की स्थिति अनुकूल हो सकती है। और जब उमंग सिंगार सीट बदल ले तब तो रंजना के लिए सोने पर सुहागा होगा। मनावर हार के बाद कुक्षी की जीत के जश्न में शामिल होने से चिंता दूर नही होगी। बीते वर्षो में व्यवहारिकता में “क्या पाया क्या खोया” पर चिंतन कर सीट का चयन करने में ही फायदा है।

जिले की विधानसभा सीटों में 5-2 से 2-5 में बदलने के दुष्परिणामों से बचने के लिए प्रदेश भाजपा पहली फुर्सत में जिले की कमान अन्य योग्य व्यक्ति को सौपकर, टिकिट वितरण में भी सही समीकरण बना कर योग्य व्यक्ति को ही, मैदान में उतारे तब जाकर ही कुछ अपेक्षाजनक परिणाम की और आगे बढ़ पाएंगे।

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