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नगर की शान… कुक्षी का गायत्री मन्दिर सरोवर भी तरस रहा सौंदर्यीकरण के लिए… तथाकथित धर्म के ठेकेदार इधर भी आगे आये : “राम कथा” में ऊर्जा दिखाने वाले नगर के राजनीतिक व सामाजिक लोग थोड़ी सी ऊर्जा गायत्री सरोवर में खर्च करें तो कल्याण हो जाये _*_”राम-कथा” सहित सभी धार्मिक आयोजन की शुभकामनाएं… लेकिन स्थानीय गायत्री मन्दिर सरोवर से सौतेलापन क्यों ? _*_एक बार ईमानदारी पूर्वक निःस्वार्थ सरोवर का सीमांकन भी होना चाहिए

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✍🏽सोमेश्वर पाटीदार-प्रधान संपादक👁
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*✒खड़ी कलम…*
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*”राम-कथा”* कुक्षी में पिछले 7 दिनों से ऋतम्भरा के मुखारविंद से धर्ममय वातावरण बनाये हुए है। सफल “राम-कथा” पुण्य के अपने सही स्थान पर पहुँचे इसकी बहुत-बहुत शुभकामनाएं…।

जानकारी के अनुसार “राम-कथा” के माध्यम से शिलाएं व दानदाताओं से सहयोग राशि एकत्रित कर बताया जा रहा है कि, वात्सल्य ग्राम वृंदावन उत्तरप्रदेश में सांस्कृतिक महातीर्थ सर्व मंगला पीठम का निर्माण किया जाना है। इसी लक्ष्य को लेकर धर्मप्रेमी तन-मन-धन से जुटे हुए है, और जुटना भी चाहिए।

लेकिन स्थानीय स्तर पर धार जिले के नगर कुक्षी में सरोवर के बीच स्थित माँ गायत्री का मंदिर भी है। ऐसा स्थान भी बहुत कम देखने को मिलेगा जो हमारे कुक्षी की शान है। फिर इस मंदिर सरोवर से नगर के प्रतिष्ठित, सक्षम, धर्म के ठेकेदार व नगर की जनता भी क्यों सौतेलेपन सा व्यवहार कर सौदर्यीकरण के लिए तरसा रहे ?

वैसे तो मुख्यमंत्री द्वारा लगभग 1.87 करोड़ रुपये सौंदर्यीकरण के लिए स्वीकृत करने के लगभग 5 वर्ष हो चुके है, जिसमे कुछ रुपए नगर पंचायत को प्राप्त होकर सम्बन्धितों द्वारा जेम-तेम खर्च भी किये गए। सही वक्त पर राशि का उपयोग न होने व शायद कांग्रेस-भाजपा की विपरीत परिषद व सरकार की वजह से भी आगे कार्य न बढ़ने की वजह बताई जा रही है।

इसी बीच घटिया निर्माण का परिचय तो निर्माणाधीन अवस्था मे सरोवर की दीवार गिर जाने से ही हो गया। निर्माण घटिया, सरोवर में पानी सड़ांध मार रहा, महंगी बताई जाने वाली चमकदार लाईट बन्द पड़ी, ड्रेनेज लाइन में भी धर्म के ठेकेदार ही रुकावट बने थे। जबकि उनके कब्जे के बीच से नाला जाता रहा, वह 2 टुकड़े आज एक हो गए और नाला दफन… अन्य निर्माण भी पूर्ण रूप से ठप आखिर क्यों ?

इन तमाम स्थितियों के साथ ही गायत्री सरोवर का ईमानदारी पूर्वक निःस्वार्थ रूप से एक बार सीमांकन करने पर नगर के प्रतिष्ठित, राजनीतिक, सामाजिक जन व सम्बन्धित ट्रस्ट के लोग भी देख-रेख कर सही क्रियान्वयन करवाने की और समय रहते ध्यान देते तो आज मन्दिर सरोवर की यह दुर्दशा नही होती।

खेर… अब तक हुआ सो हुआ पर, अब भी नगर के प्रभावी व ऊर्जावान लोगों द्वारा दलगत राजनीति से ऊपर उठकर, आगे आकर, शासकीय योजना से या जनभागीदारी व मन्दिर सरोवर को संरक्षित करने हेतु यदि जमा पूंजी हो उसका भी सदुपयोग कर नगर की शान माँ गायत्री मन्दिर सरोवर का सौन्दर्यीकरण कर एक अच्छा सन्देश देते हुए पुण्य लाभ लिया जा सकता सकता है।

पुनः धार्मिक आयोजनों की बधाई व शुभकामनाओं के साथ माँ गायत्री मन्दिर सरोवर के सौंदर्यीकरण के इंतजार में…

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