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जिले भर में भाजपा फंसी अंतर्कलह की जाल में… उबारने वाले ही खींचतान की चाल में… “भृष्ट राज बर्फा के हाथों जिले की कमान, फिर टिकट बिकने के उठते आरोपों से करें कैसे इनकार ?” : दबंग बागी भाजपाइयों ने भाजपा की सांसे फुला दी… खुद जीते या न जीते पर, भाजपाई को हराकर ही जीत मानेंगे *अशोक जैन तोड़ेगा वर्मा का घमंड… रंजना की मुसीबत भी नही कम…*

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✍🏽सोमेश्वर पाटीदार-प्रधान संपादक👁
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*✒खड़ी कलम…*
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*इन दिनों…* चल रही नगरीय निकाय चुनाव की गर्मी का तापमान धार जिले में भाजपा के लिए इतना गर्म साबित हो रहा है कि, कई स्थानों पर बगावती आग तक का सामना करना पड़ रहा है।

भाजपा के अधिकृत प्रत्याशियों की घोषणा होते ही धार, राजगढ़, कुक्षी, मनावर, धरमपुरी व अन्य स्थानों पर विरोध के स्वर मुखर हो उठे थे। नामांकन फार्म वापस लेने की अंतिम तिथि तक मान मनोव्वल का दौर जारी रहा। किंतु कई प्रमुख स्थानों पर मनाने पर भी रुष्ट नेताओं ने एक भी न मानी व अपने निर्णय पर अडिग रहते हुए बागी होकर निर्दलीय के रूप में भाजपा की नाक में दम कर रहे है।

नगर पालिका धार से वरिष्ठ हिंदूवादी नेता अशोक जैन दमखम से मैदान में उतरे हुए है। यहां वरिष्ठ नेता कहलाने वाले विक्रम वर्मा के समर्थक भाजपा प्रत्याशी अनिल जैन बाबा को ठंड में गर्मी का अहसास करवाकर अशोक जैन ने विक्रम वर्मा के घमंड को काटने का बीड़ा उठा लिया है। उनकी रैली में समर्थको द्वारा ” बीजेपी से बैर नहीं, वर्मा तेरी खेर नही” नारे लगाए गए थे।

मनावर में रंजना बघेल समर्थक श्रीमती मनु पन्नालाल पाटीदार भाजपा से अधिकृत है तो इनकी बैटरी डिस्चार्ज करने के लिए मुसीबत बनकर उभरे दबंग भाजपाई दिनेश शर्मा की पत्नी स्वाति शर्मा, यह भी टिकिट न मिलने से भाजपा से खफा होकर समीकरण बिगाड़ने का माद्दा रखते है।

उधर राजगढ़ से मजबूत बागी बनकर उभरे पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष तातेड़ ने अपना नाम वापस लेकर थोड़ी राहत जरूर दी। लेकिन परिणाम आने पर पता चलेगा कितना सच कितना झूठ।

सबसे बड़ा धमाल तो धरमपुरी में सामने आया। क्योंकि यहां के मामले में वायरल ऑडियो में वरिष्ठ भाजपाई भरत पटवा भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ राज बर्फा को बोल रहा है 50 लाख में टिकिट बिकने की बात व महेंद्र नाम के व्यक्ति के लिफाफे में ज्यादा समर्थन में नाम आने पर भी नज़र अंदाज़ कर अन्य को प्रत्याशी घोषित किया जाना। बता दे भाजपा नेता विनोद शर्मा के पुत्र प्रशांत को अधिकृत किया गया है। जिसके बाद पूर्व नगर पंचायत उपाध्यक्ष सुनील मंडलोई बागी होकर निर्दलीय खड़े होकर मुसीबत बन बैठे।

बात की जाए कुक्षी नगर पंचायत की तो, यहां पिछली बार विधानसभा में 43 हजार से हार का कीर्तिमान रच चुके मुकाम सिंह किराड़े पर भाजपा ने दांव पुनः नगर पंचायत में भी लगा दिया। मुकाम सिंह पूर्व मंत्राणी रंजना बघेल के पतिदेव है।

रंजना ने जैसे-तैसे टिकिट की जुगाड़ तो कर ही ली। परन्तु इन्हें टिकिट मिलने से नाराज़ होकर पूर्व महिला आयोग अध्यक्ष रेलम चौहान ने वंशवाद का आरोप लगाकर भाजपा ही छोड़ दी थी। जिसके बाद बढ़ती हलचल से सकते में आई भाजपा ने पुनः वापसी दूसरे ही दिन करवा ली।

मुकाम की मुसीबत तो भाजपा के ही नेता वकील मदन बघेल भी बनकर उभरे इन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का मन बनाकर नए समीकरण गढ़ दिए।

*ख़ास नज़र:-* वरिष्ठ भाजपा नेता विक्रम वर्मा घरवाली नीना के लगातार दूसरी बार विधायकी शून्य जैसी स्थिति व जिला तो दूर धार नगर में ही तालमेल बिठाकर न चलकर गुटबाजी पर बढ़ती गुटबाजी के कीर्तिमान नहीँ बना रहे क्या ? रंजना से हमेशा रंज रख कोनसे वरिष्ठ होने का परिचय दे रहे हो ?

जिले भर में बगावती बिगुल ने जिलाध्यक्ष डॉ राज बर्फा की योग्यता पर भी सवाल खड़े कर दिए है। कहीं न कहीं इनकी कार्यकर्ताओ में कमजोर पकड़ व अस्वीकार्यता की झलक इस स्थिति में साफ दिखाई पड़ रही है। अब देखना यह है कि, भाजपा के मठाधीश मनमानी के मनके पर सफल हो पाएंगे या नहीं।

*विशेष:-*कांग्रेस पर भी समीक्षा अतिशिघ्र पड़े आपके अपने “जनादेश पर नज़र” के साथ…

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