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अवैध रेत का कारोबार चरम पर, जिम्मेदारों की कभी-कभी दिखावेभर या मतलबी कार्यवाही : जिला खनिज अधिकारी व पुनर्वास में कायदे कानून की लंबी-लंबी हाँकने वाले अब कहा ? _* _ अंधाधुंध ओवरलोड डंपर से लोगो की जाने जा रही और जिम्मेदारों की अनदेखी बंद लिफाफे में कार्यवाही की और इशारा कर रही “मनावर-कुक्षी क्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारी ध्यान दे, स्थानीय क्या गुल खिला रहे”

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✍🏽सोमेश्वर पाटीदार-प्रधान संपादक👁
*📞9589123578*

*✒खड़ी कलम…*
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*धार* जिले में वैसे तो हराम की हरियाली में पलने वालो के कई अवैध धंधे संचालित हो रहे है। लेकिन फिलवक्त बताते है, तमाम कायदे-कानून को धता बताकर डंके की चोट पर जिम्मेदारों की नाक के नीचे से चरम पर रेत का अवैध कारोबार करते हुए डंपर गुजर रहे।

निसरपुर चौकी अंतर्गत 4 दिन पूर्व ही एक रेत से भरे डंपर ने बाइक सवार को टक्कर मार दी थी। जिसकी घटना स्थल पर ही जीवन लीला समाप्त हो गई थी। उसी वक़्त पुलिस ने 2 डंपरों को जब्त कर कार्यवाही की थी, जो ओवरलोड भी थे।

पुनर्वास में उपयोग हेतु कमिश्नर के मौखिक आदेश के बावजूद डूब प्रभावितों को ट्रेक्टर ट्राली से भी रेत ले जाने में कायदे-क़ानून का पाठ पढ़ाने वाले बताएंगे कि, यह रेत से भरे ओवरलोड डंपर अवैध है या नहीं ? क्या इन अंधाधुंध चलते डंपरो पर जो लोगो की जाने ले रहे है, कोई ठोस कार्यवाही होगी या विशेष अनुमति प्राप्त है?

अवैध रूप से बेख़ौफ़ खनन और परिवहन होना, जिम्मेदारों पर सवालिया निशान करते हुए बड़े बन्द लिफाफे में कार्यवाही की और इशारा कर रहा है। साथ ही रेत का कहीं भंडारण तो नही हो रहा ? वहीं जिले भर में कहीं न कहीं नेता, जनप्रतिनिधि स्वयं या इर्दगिर्द चाटुकारों की भी इस अवैध धंधे में खुल कर लिप्तता देखी जा सकती है। खासकर कुक्षी, मनावर क्षेत्र इसका गढ़ बन चुका। कई धंधेबाज तो टोल बचाने व काली कमाई को नज़र न लग जाए, इसलिए मुख्य मार्गों के बजाय ग्रामीण क्षेत्रों से भी गुजरते हुए छोटी सड़कों की ऐसी की तैसी कर रहे है।

रसूखदारों व बदमाशों की मिली भगत से बात यहां तक जा पहुँची कि, एक पत्रकार को पत्रकारिता तक छोड़ने की नोबत आ गई। जिसने डर के मारे नाम न प्रकाशित करने की बात कही। क्योंकि, कवरेज के दौरान धंधेबाजों ने उसे सख्ती से चमकाया था।

काली कमाई की आवक से उजले कपड़े पहनकर चमकते जनप्रतिनिधियों व जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी और कितने हादसों का इंतजार करेगी। या अपना काम बनता भाड़ में जाये जनता ? जिला खनिज अधिकारी भी दिखावे भर की व मतलबी कार्यवाही कर इति श्री कर लेते है। नर्मदा संरक्षण के नाम पर करोड़ो बर्बाद करने वाले किस बिल में सो गए। या फिर तगड़ी दक्षिणा ठेठ तक पहुँच रही ?

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