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उम्मीद-17…एसडीएम कुक्षी : पुनर्वास स्थल व राहत शिविर कार्यो में आने लगी अनियमितता, लापरवाही व भृष्टाचार की बदबू _*_बिजली पोल पर स्ट्रीट लाइट सामग्री में भारी गड़बड़ी सामने आने के बाद, अन्य मामलों में भी क्या खुलेगी पोल ? # पुनर्वास क्षेत्र में रात-दिन एक करने वाले एसडीएम व प्रशासक (आईएएस) रिशव गुप्ता क्या देख रहा था, या चले कम हांफे ज्यादा ? “स्ट्रीट लाईट गड़बड़ी पर कार्यवाही करने वाले दूसरे कार्यो का भी करें सत्यापन, कहीं पोलपट्टी तुम्हारी न आ जाएं ?” ~गरिमा इंटरप्राइजेस किसकी ? और इसके साथ कोंन-कोंन निभा रहा यारी…? पर्दा हटना ही चाहिए~

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✍🏽सोमेश्वर पाटीदार-प्रधान संपादक👁
📞9589123578

*पत्रकारों..* को नसीहत देने वाला… हमसे उम्मीद करने वाला… ज्ञानचंद एसडीएम गुप्ता अब बताये कि, सरदार सरोवर परियोजना के पुनर्वास स्थलों व राहत शिविरों में बिजली के पोल पर स्ट्रीट लाईट लगाने में अनियमितता, लापरवाही व भृष्टाचार जैसी पोल पट्टी की बदबू क्यों आ रही ? तुम तो जनता से मुखातिब होते वक़्त कहते रहते थे कि, डूब क्षेत्र में रात-दिन एक कर रहे हो। तो क्या देखा… या सिर्फ चले कम हांफे ही ज्यादा ?

अतिविश्वस्त सूत्रानुसार सरदार सरोवर परियोजना के पुनर्वास स्थलों व राहत शिविरों में स्थापित बिजली के पोलो पर सीएफएल लगाने का कार्य नगरीय निकाय के अंतर्गत स्वीकृत दरों पर किया जाना था। किंतु सीएमओ नगर परिषद कुक्षी द्वारा आदेश का पालन नही करते हुए 100 पोल पर एलईडी 40 वाल्ट तथा 600 स्थानों पर एलईडी 80 वाल्ट की उपयोग की जाकर लगाई गई। केवल 8 स्थानों पर ही सीएफएल लगाई गई है ?

निकाय द्वारा क्रय करने के पूर्व सामग्री का आकलन व स्ट्रीट लाईट लगाने में भी अनावश्यक उपयोग कर धूल में लट चलाते हुए शासन पर वित्तीय भार डाला ? साथ ही सम्बन्धित फर्म गरिमा इंटरप्राइजेस इंदौर से सामग्री क्रय सूर्या अथवा ब्रांडेड कम्पनी की होनी चाहिए थी। किंतु उपयोग की गई सामग्री लोकल कम्पनी की प्रतीत हो रही ?

बताया जा रहा स्ट्रीट लाईट लगाने के सम्बंध में निकाय द्वारा जो कार्यवाही की गई। उस कार्यवाही में स्ट्रीट लाईट लगाने एवं उक्त कार्य पर होने वाले सम्पूर्ण व्यय की सक्षम स्वीकृति तत्कालीन परिषद से की जाना थी जो कि, प्राप्त नही की गई है। राशि 50 लाख से अधिक के व्यय की स्थिति में सक्षम अधिकारी की स्वीकृति प्राप्त करना नितांत आवश्यक है ?

लापरवाही व अनियमितता की हदें तो देखो न तो लेखा शाखा से नियमानुसार परीक्षण किया गया और सामग्री प्राप्ति व वितरण तथा उपयोग होने सम्बन्धित किसी जवाबदार अधिकारी द्वारा प्रमाणीकरण भी नही किया गया ?

तो उम्मीद व तस्दीक करने वाले ज़नाब रिशव गुप्ता से उम्मीद करता हूँ कि, उक्त कारनामों का भी जरा ईमानदारी से तस्दीक करावें। विश्वस्त सूत्रों से मिली जीतनी भी बातें मेने लिखी है, वह मेरे सवाल है, क्या यह सच है या झूठ है, आप ही बताएं ? निश्चित रूप से फिलहाल तुम्हारी ईमानदारी पर संदेह नही। लेकिन आईएएस डिग्री की गर्मी दिखाने वाले एसडीएम व प्रशासक के होते हुए यह बदबूदार समाचार का आना सवाल खड़े करता है।

फिलवक्त तो यही मामला है, आगे देखते है पुनर्वास में और भी घोटालो के कुछ गुल खिलते है या नहीं, वक़्त बताएगा। तो चलते है दोषियों पर अतिशीघ्र कार्यवाही की और बढ़ने की शुभकामनाओं के साथ फिर मिलेंगे नई उम्मीद के साथ…

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