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तुम्हारे ही पुराने चावल उबल रहे, अब तो अंध भक्तों को स्वीकारना होगा, मोदी राष्ट्र के लिए “हानिकारक” : मोदी व जेटली की केटली गर्म करते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता सिन्हा ने कहा- नोटबन्दी, जीएसटी से बिगड़ी अर्थव्यवस्था, हो गया कबाड़ा_*_राष्ट्रव्यापी अंधत्व निवारण अभियान चलाकर मोदीयाबिंद से छुटकारा दिलाये राष्ट्रहितैषी लोग _*_ बदले तरीके से 5.7 जीडीपी गिरती दिखाई जा रही जबकि 3.7 रह गई “पीएम मोदी ने तो गरीबी देखी लेकिन, वित्तमंत्री जेटली लोगों को दिखा रहे”

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✍🏽सोमेश्वर पाटीदार-प्रधान संपादक👁
📞9589123578

*✒खड़ी कलम…*
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*अकल के अंधों…* अब यह मत कहना कि, मोदी, भाजपा, संघ को बदनाम करने की साजिश! क्योंकि, न में, न विपक्ष, न कोई अर्थशास्त्री या कोई और… बल्कि, आपका अपना ही अटलबिहारी सरकार में वित्तमंत्री रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा का कहना है, कि… नोटबन्दी और जीएसटी से देश की अर्थव्यवस्था बिगड़ी है।

इतना ही नही, सिन्हा ने स्पष्ट रूप से तानाशाही नरेंद्र मोदी और वित्तमंत्री अरुण जेटली की केटली को गर्म करते हुए कहा कि, नोटबन्दी ने गिरती जीडीपी को कमजोर किया है। आज न तो नोकरी मिल रही है, न विकास तेज़ हो रहा। जिसका सीधा असर निवेश व जीडीपी पर पड़ा है। जीडीपी अभी 5.7 है, सभी को याद रखना चाहिए कि, सरकार ने वर्ष 2015 में जीडीपी तय करने के तरीके को बदला था। अगर पुराने नियमों के अनुसार देखे तो आज जीडीपी 3.7 होगी।
जीएसटी में कई खामियां बताते हुए कहा- जेटली ने अर्थव्यवस्था का कबाड़ा कर दिया।

इतने पर ही नही रुके सिन्हा ने खुद की सरकार को नंगा करते हुए यहां तक कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तो गरीबी देखी थी। लेकिन, वित्तमंत्री अरुण जेटली लोगो को दिखा रहे है। सिन्हा ने कहा- मुझे अब बोलना ही होगा नही बोला तो राष्ट्रीय कर्तव्य को नही निभा रहे होंगे। जो बोलने जा रहे वह बड़ी संख्या में भाजपाइयों की भावना है, लेकिन वे डर से नहीं बोल पा रहे है।

सारी ज्ञानेंद्रियां खोल कर सुन लो, समझ लो, अपने लेख के बाद एएनआई को दिए इंटरव्यू में भी यशवंत सिन्हा ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया।
उधर अभिनेता व भाजपा नेता शत्रुध्न सिन्हा ने भी समर्थन किया साथ ही शिवसेना ने भी भाजपा को चुनोती देते हुए कह डाला कि, यशवंत सिन्हा की बातों को गलत साबित करें भाजपा।

इसी तरह एक-एक कर डूबते भाजपाई जहाँज से निकलकर खुद के ही लोग मुकर हो रहे है।देश तो उन नोटंकीबाज अन्ना हजारे व रामदेव को भी ढूंढ रहा है। क्योंकि “इतना सब कुछ हो रहा रामदेव व अन्ना हजारे कहा सो रहा” कहा गया स्वदेशी वाला पाखंडी और भृष्टाचार विरोधी अन्ना ? साथ ही कहा गए वह लोग जो नोटबन्दी के वक़्त अर्थशास्त्रियों को भी गलत साबित करते हुए सरकार की चाटुकारिता में खुद वरिष्ठ अर्थशास्त्री बन बैठे थे ? अब सिन्हा की बात को गलत साबित कर दिखाये।

खुद के स्वार्थ के लिए सत्ता के हवसखोरों ने राजनीति व धर्म को अपनी सुविधा अनुसार चलाते हुए भक़्तों को भावनात्मक रूप से आज़ाद भारत में भी गुलाम नही बना रखा क्या ? इनके कु-कर्मो पर बोलो तो अधर्मी व देशद्रोही करार देते है। सत्ता में आने के बाद तो ऐसा लगता है जैसे इन्होंने प्रमाण-पत्र देने का ठेका ही ले रखा हो। चाईना के माल का विरोध करेंगे पर सरदार पटेल की मूर्ति वही से बनवाएंगे ओर मोबाइल भी वहीं चलाएंगे ? 2 सीट से लेकर आज पूर्ण बहुमत में आने के बाद भी राममंदिर वहीं बनाएंगे पर तारीख नही बताएंगे ?विपक्ष में रहते हुए इन धर्मधुरंधरो के जो बयान उगले गए थे। उस वीडियो को भी जरा फिर से देख लो, मोदीयाबिन्द से थोड़ी राहत मिलेगी।

राष्ट्रहितैषी लोग आगे आये और राष्ट्रव्यापी अंधत्व निवारण अभियान चलाकर मोदीयाबिंद से मुक्ति दिलावे। क्योंकि यह लोग अब धर्म के साथ देशभक्ति को भी अपनी सुविधा अनुसार उपयोग कर सत्ता भोग करने का पाखंड करते ही जा रहे।

“मन की बात” में मोदी मन की कहे या न कहे। लेकिन में डंके की चोट पर अपने मन की बात यह कहने जा रहा हूँ कि, प्रधानमंत्री के लिए प्रस्तावित करते वक़्त ही मीडिया चेनलो के माध्यम से दिखाए गए इसके चौखटे की झलक से दोगलापन स्पष्ट प्रतीत हो रहा था। जो 3 साल सत्ता में रहने के बाद आज खुद के ही लोगो ने मुकर होकर मेरे अनुमान पर मोहर लगा दी।

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