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शासन-प्रशासन हुआ बे-लगाम… नर्मदा घाटी में मेधा सहित गैर-मौजूद लोगों पर लादे जा रहा झूठे प्रकरण : डूब प्रभावितों के अधिकारों का गला घोंटने के लिए क़ानूनी गुंडागर्दी पर उतरा पुलिस प्रशासन_* _तानाशाही सरकार की नज़रों में नंबर बढ़ाने हेतु फूलसिंह बने अधिकारी “गैर-मौजूदगी में पत्रकार पर झूठा प्रकरण लादना चौथे स्तम्भ पर सीधा प्रहार”

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✍🏽सोमेश्वर पाटीदार-प्रधान संपादक👁
www.janadeshparnazar.com
📞9589123578

*✒खड़ी कलम…*
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*सरकार हमसे डरती है…पुलिस को आगे करती है…* नर्मदा बचाओ आंदोलन का यह नारा इन दिनों घाटी में चरम पर चरितार्थ हो रहा है। ऐसा लग रहा जैसे डूब प्रभावित क्षेत्र को शासन-प्रशासन ने रणभूमि ही मान लिया हो। एक मात्र जुमलेबाज नरेंद्र मोदी के मन की करने के लिए, उसका महिमा मंडन करते हुए तानाशाही पर शासन-प्रशासन उतारू हो गया है। डूब प्रभावित व उनकी बात को लेकर एनबीए नेत्री मेधा पाटकर शासकीय कार्यालय व भोपाल दिल्ली के जिम्मेदारों से मिलने जाए तो कभी बहाने बाजी या किसी और कारण से इनकी बात को सुनने तक को राजी नही थे, और कुर्सियां छोड़ कर भागते रहे।
जब इनके द्वारा अनिश्चितकालीन उपवास किया जा रहा था तो राष्ट्रीय लेवल पर होती किरकिरी से सरकार ने मेधा के स्वास्थ्य का बहाना भिड़ा कर बलपूर्वक अनशन स्थल चिखलदा से उठाया ही नही, बल्कि 47 नामजद सहित 2500 (ढाई हजार) लोगो पर धारा-307 व अन्य धाराओं में झूठा प्रकरण दर्ज कर दिया गया। उपवास करने वाले लोग 1 हजार पुलिस बल व प्रशासन की मौजूदगी में हत्या का प्रयास करेगा क्या ? इसी दौरान धारा-365 भी मेधा पर दर्ज हो जाती है, अनशन पर बैठे-बैठे वह अपहरण कैसे कर सकती है किसी का ? इतना ही नही पुलिस एक कदम ओर आगे बढ़कर अपने वरिष्ठों की नज़रों में नंबर बढ़ाने व तानाशाही सरकार से कृपा पाने के लिए, बताया जा रहा है कि, जो व्यक्ति इस दुनिया मे ही नही रहा, उसका भी नाम एफआईआर में दर्ज कर लिया गया है। इसी प्रकार कई प्रकरणों में आँखे बंद कर फर्जी नाम डालते गए।

गत रात्रि ही फर्जी प्रकरण धारा-307 के तहत निसरपुर पुनर्वास से राहुल उर्फ गोलू पाटीदार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। ताकि वह भी मेधा पाटकर व डूब प्रभावितों के साथ खड़ा होकर आंदोलन में सक्रिय न रहें।

गत दिवस दिनांक 18/09/17 सोमवार को ही धार जिले के निसरपुर में जल सत्याग्रह के पश्चात मेधा पाटकर यहां डूब चुकी निचली बस्ती के लोगो से मिलने पहुँची थी। जहां पर अपनी पीड़ा लेकर मिलने वालों की संख्या बढ़ती गई। जिसे लेकर पुलिस प्रशासन ने धारा-144 का उलंघन मानते हुए मेधा पाटकर, प्रदीप एच पाटीदार, कैलाश रामा पाटीदार, प्रखर, कैलाश मालवीया, दिनेश रणछोड़, मुकेश मेतर, सुरेश प्रधान, सुखदेव चम्पालाल पाटीदार, राहुल गोलू पाटीदार, सुमन बाई, देवराम भारुंड खापरखेड़ा व 4-5 अन्य पर एक और प्रकरण दर्ज कर लिया। यह प्रकरण भी निर्मल बाबा की तर्ज पर क्या करने से कृपा… सरकार के कहने पर ही दर्ज किया होगा। तभी तो कुमरावत की दुकान पर बैठकर गरम आलू बड़े खाते-खाते जो लोग उस दिन थे ही नही उनका भी नाम झूठे प्रकरण में दर्ज कर लिया गया।

में स्वयं मेधा पाटकर के निसरपुर बस स्टैंड आने से लेकर वापस जाने तक कवरेज करता रहा इस बीच प्रदीप एच. पाटीदार व प्रखर तातेड़ नही मौजूद थे, बावजूद निसरपुर में ही नही होने वाले इन जैसे लोगों पर धूल में लट चलाते हुए झूठा प्रकरण थोप दिया गया। बता दूं प्रदीप एच पाटीदार बरसो से पत्रकारिता करते आ रहे, इन पर भी झूठा प्रकरण दर्ज करना मतलब मीडिया की आवाज़ को दबाना ही है। फर्जी लोकार्पण तो मोदी कर चुका अब क्या जरूरत पड़ गई झूठ के सहारे की ? कानून का उलंघन अगर हो रहा है तो कार्यवाही हो, पर दहशत फैलाने व परेशान करने के लिए यह जबरन क्यों ? इतनी ही तत्परता सरकार इनकी जायज़ मांगो को सुनने व समाधान में क्यों नही लगती ? एनवीडीए के भृष्ट अधिकारी व दलालों पर कार्यवाही क्यों नही ?

मेने अक्सर देखा व भुगता भी है कि, शासन-प्रशासन को सीधा-सीधा कटघरे में खड़े करने वाले मामलों में फरियादी की बात सुनने के बजाय उसे दबाने के हटकंडों पर ज्यादा जोर दिया जाता है। मतलब तुम कुछ भी करो दिन को रात या रात को दिन जैसा कहो वैसा हम माने, यह लोकतांत्रिक नही एकतंत्री सरकार का ठोकतंत्र है, जो पूर्णबहुमत में आने के बाद हजम नही हो रहा। साथ ही सरकार के इशारों पर बे-लगाम होते अधिकारी यह जान ले कि, इन सबसे कोई कृपा होने वाली नही है। और जिनको खाना-ख़ुसटना था वह एनवीडीए के अधिकारी व दलाल खा चुके और अभी भी हाथ फेरने की फिराक में है। करोड़ो का पुनर्वास पर अस्थायी व्यवस्था भी उन्ही की है। पुलिस प्रशासन को जबरन फूलसिंह बनने की जरूरत नही क्योंकि हाथ में खाया पिया कुछ नहीं ग्लास तोड़ कर बारह आने भी जमा हो जाएंगे। क्योंकि आगामी समय में जब कोर्ट-कोर्ट खेलने की बारी आएगी तब कोई वरिष्ठ या सरकार का व्यक्ति साथ नही खड़ा होगा तब खुद के हाथ जगन्नाथ रहेंगे। इसलिए ठंडे दिमाग से सोच ले ज्यादा गर्मी दिखाने के बदलें… सद्बुद्धि की कामना के साथ…

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