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नर्मदा घाटी से गरजती मेधा बोली- सरदार सरोवर बांध का मोदी ने किया फर्जी लोकार्पण… पुनर्वास नीति का नही हो रहा पालन : खटिया से तो प्रशासन ने आश्वस्त कर मोहन को उठाया पर, खाते में एक फूटी कौड़ी भी न डालकर लटकाया_*_महाभृष्ट अधिकारियों की मेहरबानी से दलाल अब भी सक्रिय ! “विकास के नाम पर हजारों का विनाश नही हो रहा क्या तानाशाही सरकार ? “

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✍🏽सोमेश्वर पाटीदार-प्रधान संपादक👁
📞9589123578

*✒खड़ी कलम…*
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नि:संदेह…*सरदार सरोवर बांध की पूर्णता तभी कहलाएगी जब डूब प्रभावितों का आदर्श पुनर्वास व सिंचाई हेतू नहरों का कार्य पूर्ण हो जाएगा। यह कोई और नहीं पुनर्वास नीति कह रही है। अगर नहरों की बात करें तो गुजरात के ही भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री रहे सुरेश मेहता का कहना है कि, 41 हजार किमी लम्बाई की नहरों का निर्माण करना बाकी है। जिससे स्पष्ट होता है कि, कृषि की सिंचाई का उद्धेश्य कम पर अडानी-अम्बानी जैसों की कंपनियां जरूर सिंचित हो सकती है। और कम्पनी सिंचित करने व घर भरने के पीछे इनसे मोदी की यारी जगजाहिर है। दूसरी तरफ पुनर्वास पर गौर करें तो कई को पट्टे व मुआवजा राशि से वंछित होना बताया जा रहा। लोकार्पण के पूर्व ही गुजरात के डूब प्रभावित धरने पर बैठकर विरोध दर्ज करवा रहे थे जिन्हें मोदी के जश्न से पूर्व ही उठा लिया और गिरफ्तारियां हुई। तमाम असुविधा व डूब प्रभावितों की जायज़ मांगो को लेकर नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर जल सत्याग्रह समाप्त करने के पश्चात डूब प्रभावित धार जिले के ग्राम निसरपुर पहुँचकर प्रभावितों से मिली। डूब प्रभावितों व मेधा पाटकर से चर्चा पर निचोड़ निकलकर यह आ रहा है कि, इस गांव की 129 मीटर के वाटर लेवल में आने से गरीबों की निचली बस्ती डूबी। जिनके मकान डूब चुके उनमें किसी को पट्टा नही तो किसी को 5.80 लाख की पैकेज राशि नही मिलने की शिकायत आज भी आई है। वैसे भी सरकार ने जादूगरी दिखाते हुए उक्त पैकेज की राशि एकमुश्त खाते में डालने का ढोल पीटा था। लेकिन उसे भी कार्यक्रम करते वक़्त 2 किश्तों में तब्दील किया, उसमें भी भारी मसक्कत करनी पड़ रही है। अपात्र-पात्र व पट्टा सहित पैकेज दिलाने के नाम पर दलाल अब भी सक्रिय है, और इनकी सक्रियता के लिए ऊर्जा पैदा करने में महाभ्रष्ट अधिकारियों की ही मेहरबानी बताई जा रही है। जिनके बताये रास्ते पर चलते हुए हराम की हरियाली में वारे-न्यारे हो रहे। आश्चर्य की एक ओर बात यह भी है कि, जो मोहन प्रजापत घर मे पानी घुसने के बावजूद पैकेज राशि की मांग पर अड़ते हुए खटिया लगाकर खुद के आंगने में बैठा रहा। बढ़ते पानी डुबती खटिया की न्यूज़ मीडिया में चलते ही प्रशासन की धड़कने बढ़ने लगी तो पैकेज राशि खाते में आनन-फानन डाल दिये जाने का आश्वासन सामने आया और राशि डल जाने की बात पर यह प्रभावित वहां से हट गया था। जिसकी हकीकत आज यह सामने आई है कि, पांव से बीमारी की वजह से चलने में असमर्थ मोहन के खाते में अब तक राशि ही नही डाली गई। जब एक मोहन की इस हालत में भी शासन-प्रशासन ने और दयनीय हालत कर दी तो औरो की क्या बात करें। इसी बस्ती में प्राचीन तेजाजी मन्दिर भी स्थित है परंतु अब तक इसका न तो पट्टा और न मुआवजे का ठिकाना है। ऐसे कई लोग आज डूबने के बाद भी अधिकारों से वंछित है तो, फिर ऊपर की बस्ती अब, जब भी डूबेगी उनकी क्या दशा होगी। निचली बस्ती के कई लोगो ने खुद के व्यय पर मकान खाली किये। जबकि, यह काम एनवीडीए को करना चाहिए था। बात व्यापारियों की करें तो कागज पर दुकानों के नक्शे बने है पर धरातल पर कीचड़ ओर कचरा ही पड़ा है। सरकार द्वारा व्यापारियों को आजीविका अनुदान दिए जाने हेतु तत्कालीन जारी रिपोर्ट के अनुसार 33 हजार व एसटी, एससी हेतु 49 हजार तय था। जो कि, महंगाई के कारण आज बढ़कर मिलना चाहिए, पर नही मिल रहा। उधर निसरपुर पुनर्वास पर स्ट्रीट लाईट लगभग 20 दिनों से लगातार बन्द पड़ी रही है, जो तबड़तोल ही प्रशासन की पोल खोल रही है। इन हालातों में लोकतांत्रिक देश का प्रधानमंत्री अपने जन्मदिवस पर बांध का लोकार्पण करते हुए कहे कि, इसे रोकने के लिए कई साजिशें हुई। तो साहेब हजारों डूब प्रभावितों के अधिकारों व बिना आदर्श पुनर्वास बेदखल कर डूबोने की सही मायने में तो आपने साजिश रची है। यह डूब प्रभावित लोग इसी मिट्टी के है, कोई राष्ट्रविरोधी नही, जिनकी परवाह किये बिना आपने कई कमियों के बावजूद फर्जी तरीके से लोकार्पण कर चुनावी गणित भिड़ाया। आपके भाषण में अहम ओर में…में… की बू ज्यादा आ रही थी। जैसे बांध को जादू की छड़ी से तुमने सत्ता में आते ही खड़ा कर दिया हो। सरदार पटेल की प्रतिमा की बात करें तो जरा यह भी बता देते की यह बन कर कहा से आ रही है ? आपने म.प्र. के नोटंकीबाज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी धन्यवाद दिया था क्या इसीलिए की उन्होंने वर्षा नही होने पर भी ऊपर के बांधो का पानी छोड़कर सुखी जमीनों ओर किसानों की चिंता किये बिना नर्मदा घाटी को डुबोया ओर तुमको जन्मदिवस पर खुश कर दिया ? शिवराज को नर्मदा सेवा यात्रा और हजारों पेड़ो के लिए पौधरोपण हेतु भी धन्यवाद देकर तुमने पहले ऐसा मुख्यमंत्री पहले कभी नही देखा यह बात कही। जी हां… सच कहा ऐसा मुख्यमंत्री पहले कभी नही था जो नर्मदा सेवा यात्रा की नोटंकी पर जनता के करोड़ो रूपये फूंक दे और जनता परेशान होती रहे। साथ ही गिनीज़ बुक रिकार्ड के चक्कर मे 6 करोड़ पौध रोपण के नाम पर करोड़ो का चूना लगा दे ? जरा लगाए पोधो की सही गणना व जीवित भी है या नही जान लेते।वो तो सद्बुद्धि न जाने कहा से शिवराज को आ गई जो तुम्हारे फर्जी लोकार्पण में नही आया। और आता भी तो किसानों व आदिवासियों का विरोधी बनकर ही, नर्मदाघाटी का शुभचिंतक बनकर नही। तूमने कहा था बड़ा करते हो, बड़ा सोचते हो, छोटा तो करते ही नही हो, बिल्कुल सही कहा- एक-दो नही हजारों डूब प्रभावितों के अधिकारों को मार कर विकास के नाम पर विनाश किया है।पुराने जुमलो के निष्प्रभावी होने के कारण तुमने अब चुनावी व वर्तमान स्थिति के अनुसार कुछ नए जुमले भी लोकार्पण के दौरान हवाई फायर किए है जिस पर से वक़्त आने पर पर्दा हटेगा। साथ ही अंधभक्त कमेंट्स करते समय अपनी औकात न भूले। क्योंकि वक़्त आने पर सत्ता के दलाल किसी के नही होते तस्दीक करना हो तो निसरपुर भाजपा के अध्यक्ष धुरजी भाई पाटीदार से मिलो और कर लो…

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