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अधूरे पुनर्वास नर्मदा घाटी को जबरन डुबाकर शिवराज दे रहा मोदी को तोहफा # सवाल जन्मदिन पर उद्घाटन : सरदार सरोवर बांध राष्ट्र की संपत्ति या मोदी के बाप की जागीर ? “एक तरफ बर्बादी का मातम और दूसरी तरफ मोदी का जश्न”

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✍🏽सोमेश्वर पाटीदार-प्रधान संपादक👁
📞9589123578

*✒खड़ी कलम…*
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*सत्ता* के नशे में तूम तो जश्न मनाओ साहेब… वैसे भी तानाशाहियों को अवाम की आवाज़ सुनाई कहा देती है। क्योंकि मन की बात करते है पर, करते खुद की मनमानी ही है। जैसे कि, आज देश का प्रधानमंत्री होकर नरेंद्र मोदी ने सरदार सरोवर बांध पर आरती पूजा कर उद्घाटन किया। वह भी ऐसा अवसर चुना जब खुद जुमलेबाज मोदी का ही जन्मदिन है। सवाल यह उठता है कि, क्या यह सरोवर नरेंद्र मोदी की निजी संपत्ति है, जो जन्मदिन पर ही राष्ट्र को समर्पित करने की नोटंकी करते हुए खुद का जन्मदिन भव्य रूप से मनाए ? इसके बजाय महापुरुष की जयंती, राष्ट्रीय पर्व या अन्य दिवस भी कार्यक्रम आयोजित कर ढोल पिट कर समर्पित कर देते। आज आयोजित यह कार्यक्रम राष्ट्र को नही, अपितु जन्मदिवस के अवसर पर मोदी को समर्पित ज्यादा प्रतीत हो रहा। इतना ही नही वह भी उस परिदृश्य में जब इस सरदार सरोवर से डूब प्रभावित हजारों लोगों का पुनर्वास बाकी हो। हजारों परिवारों की जायज मांगों को अनसुना करके सत्ताई एकाधिकार के चलते इनके अधिकारों को ही दफना दिया जाए। धर्म,आदर्श,संस्कारों की बातें करने वालों सत्ता की हवस पूरी करने के लिए अयोध्या के राम मन्दिर या बाबरी मस्जिद को तो खूब भुनाया व भुना रहे हो। अब आंखे क्यों फूटी जब डूब प्रभावित नर्मदा घाटी में कई मंदिर-मस्जिद धार्मिक स्थल डूब रहे है। कुछ करना तो दूर तानाशाही सरकार की नज़रों में इन धार्मिक स्थलों को राष्ट्रीय महत्व का ही नही होना बताया जा रहा है। और राज्य का मुख्यमंत्री होकर शिवराज सिंह चौहान सूखे की परवाह किये बिना, वर्षा नही होने के बावजूद जबरन ऊपर के बांधो से पानी छोड़कर नर्मदा घाटी को डुबाता है और नरेंद्र मोदी को खुश करने के लिए उसके जन्मदिवस पर तोहफे के लिए यह सब कुछ कर जाता है। इस वर्ष गुजरात चुनाव पर जनता का मन मोहना है तो अगले वर्ष मध्यप्रदेश की भी बारी है यह क्यों भूल रहे शिवराज ? दूसरी तरफ कई अपात्रों को लाभ देने व पात्रों को उपेक्षित रहने की बात सामने आ रही है। तमाम असुविधा व बिना पुनर्वास के डूबोने के चलते एनबीए नेत्री मेधा पाटकर के साथ कई डूब प्रभावितों का जलसत्याग्रह जारी है। गुजरात में मोदी जश्न मना रहा है वहीं मध्यप्रदेश में चाटुकारों व अंधभक़्तों को छोड़कर काला झंडा लगाकर काला दिवस मना रहा है। जिसका एक मात्र कारण नर्मदा घाटी की बर्बादी की सही मायने में सुध नही लेना ही है।सारी ज्ञानेंद्रियां खोल कर सुनले वो पाखंडी साधु संत भी जो धर्म के नाम पर भारतीय समाज को भ्रमित कर आपस में लड़वाने व नरेंद्र मोदी जैसे हठधर्मी, पाखंडी, जुमलेबाज, दोगले, टुच्चे और हमारी आन-बान-शान तिरंगे का अपमान करने वाले का सही/गलत की परख किये बिना अंधभक्ति करते हुए चाटुकारिता में लीन है अपनी औकात में ही रहे। साथ ही उस पाखंडी को यह भी कहना चाहूंगा जो बड़ी दाड़ी व जटा रख मेरे लिखने के बाद स्वार्थ के चलते टुच्ची मानसिकता का परिचय देते हुए संत समाज को कलंकित कर रहा है कि, तेरा ढोंग व कमीनापन तेरे ही द्वारा उपयोग किये जा रहे शब्दों से दिखाई पड़ रहा है। इसलिए समय रहते सुधर जा नही तो कुंडली बनाने में देर नही लगेगी। जनादेश की हर तरफ नज़र है…

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