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छलनी करें तो कई डेरो में रामरहीम जैसे पाखंडी निकलेंगे…_*_धर्मान्ध फैलाने वाले कपटी साधु व मोलवियों से सावधान रहे भारतीय समाज_*_ हिंदूवादियों के राज में सरदार सरोवर से डूबने वाले मन्दिरों को गैर-राष्ट्रीय महत्व का बताने पर कहा सो गए टुकड़े तोड़ ? “नशे दबाओं तो थन-थन कूदने लगते पाखंडी”

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✍🏽सोमेश्वर पाटीदार-प्रधान संपादक👁
📞9589123578

*✒खड़ी कलम…*
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*राम रहीम…* आजकल हर तरफ इनके चर्चे छोटे से बड़े व्यक्ति की जुबां से सुने जा रहे है। हरियाणा हिसार डेरा सच्चा सौदा का यह पाखंडी धर्म की आड़ में अपना अलग ही आडम्बरी साम्राज्य खड़ा करके ठाट से खांट पर रंगरेलिया मनाता रहा। इसके द्वारा ऐशो आराम से परिपूर्ण निर्मित आश्रम था या अय्याशी का अड्डा ? इसके ऊपर 15 वर्ष पूर्व साध्वी द्वारा बलात्कार का प्रकरण दर्ज कराया था। जिसकी सजा पिछले दिनों सुनाते हुए न्यायालय ने 20 साल के लिए बलात्कारी गुरमीतसिंह रामरहीम को जेल की सलाखों के पीछे धकेल दिया। परत दर परत इस बलात्कारी रामरहीम की कारस्तानियां उजागर हो रही। पिछले दिनों इसके ठिकाने पर लगभग पांच हजार पुलिस बल के साथ पहुँच कर कार्यवाही की गई थी जिसमें कई राज सामने आए थे। इसी प्रकार ओर भी पाखंडी लोग समाज को संत के रूप में चौखटा दिखाकर खुद के कुकर्मो के कारण सलाखों के पीछे तो, कोई नज़रो से गिरे पड़े है। छलनी लगाकर देखे तो कई रामरहीम हराम के टुकड़े तोड़कर अन्य ठिकानों पर भी अय्यासी करते नज़र आएंगे…? किसी भी धर्म के नाम पर अपनी दुकानदारी चलाने के लिए मानव जाति व देश की बात करें तो भारतीय समाज को जाति, धर्म, क्षेत्र व भाषा के नाम पर तोड़ने व भ्रमित करने की घिनोनी हरकत करें उन पाखंडियो से सावधान रहना होगा। धर्म का डर दिखाकर सही मायने में यही अधर्मी लोग अपने स्वार्थ व वर्चस्व बनाये रखने के लिए आपस में लड़वाने का दुस्साहस करते है। सनातन धर्म के जयघोष के साथ प्राणियों में सद्भावना व विश्व का कल्याण कहने वाले कुछ पाखंडियो के मन में भयंकर दुर्भावना अपनी दुकान चलाने के लिए प्रकट करते है। जबकि संत, मोलवी या धर्मगुरु कोई भी हो ईश्वर एक है, उसकी पूजा के तरीके व रास्ते अलग हो सकते है। फिर उसके बनाये इंसान लम्बी दाढ़ी या जटा रखकर तोड़ने का भाव पैदा करें यह कहा तक उचित ? और ऐसे ना-लायक साधु कैसे ? इतना ही नही आजकल तो बड़ी दाड़ी व जटा वाले कपटी ना-लायक लोग अपने विचारो से हरामजादे व रंडिया जैसे शब्द एक मृत महिला के लिए भी प्रयोग करते है। इनकी इस करतूत से साधु तो क्या पर उसके चरणों की धूल भी नही हो सकते ऐसे लोग। में हर धर्मगुरु, साधु-संतों का सम्मान व नमस्कार करता हूँ, परन्तु ऐसे कपटीयों का में तो क्या पर भारतीय समाज ने बहिष्कार करना चाहिए। जिस प्रकार पिछले दिनों संत समिति ने 14 पाखंडियों को औकात दिखाई थी। ऐसे ही ओर भी लोग समाज को कलंकित करने वाले अन्य ठिकानों पर जमें हो, उन्हें चिन्हित कर उनकी करतूतों को उजागर करना चाहिए। क्योकिं ऐसे लोग पूज्यनीय संतों के नाम की खाकर स्वयम्भू ज्ञानी बने फिरते। और जब इनकी असली औकात दिखाओ तो थन-थन कूदने लगते है। कहना चाहूंगा कि, समाज को धर्म के नाम पर भ्रमित व अंधत्व फैलाकर राजनीति करने के बजाय अपनी औकात में रहे ऐसे लोग। नही तो तुम क्या बनाओंगे समय आने पर तुम्हारी कुंडली बना दी जाएंगी…

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