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गौरी लंकेश : तलवार की धार पर चलकर सच लिखा जाता है साहब…मौत के सौदागरों में सुनने का साहस नहीं_* *_पत्रकारिता पर सवाल खड़े करने वाले भड़वे खुद संस्कारो की चड्डी कोनसे कोठे पर छोड़ आये ढूंढो ? “एक नही…सो बार कहेंगे, झूठ की फैक्ट्रियां चलाते सत्ता के दलाल”

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✍🏽सोमेश्वर पाटीदार-प्रधान संपादक👁
📞9589123578

*✒खड़ी कलम…*
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कुछ न कहो… इन्हें झूठ की फैक्ट्रियां चलाने दो… अंधी श्रद्धा का भ्रम फैलाने दो… कल अंग्रेजो के थे, आज अपने से अपनो को गुलाम बनाने दो… जाति, क्षेत्र, भाषा, धर्म के नाम पर मौत का नंगा नाँच नचाने दो… किसी भी दल का नेता हो सत्ता सुंदरी के लिए एक बिस्तर पर सो जाने दो… जनमुद्दे पर भोकने वालो को, खुद के वेतन वृद्धि पर मेजे थपथपाने दो… जनकल्याणकारी योजनाओं में पहले इनके कमीशनखोरी पर दिमाग टकराने दो… बेटी बचाओ अभियान वालो के बिस्तर पर जबरन सुलाने दो… मां-बहन की अस्मत को जब ये चाहे उजड़ जाने दो… कर्नाटक की हर करवट पर सत्ताई गुना भाग लगाने दो… निर्धन के मुंह से निवाला छीन कर सत्ता की मलाई खाने दो… अधिकारों की बात करे तो कानूनी जाल में फ़साने दो… लोकतंत्र की हत्या करके एक तंत्र चलाने दो… मनमानी का महिमा मंडन करके थोपतंत्र बनाने दो… कुछ ऐसे ही मुद्दों पर संविधान में दिए अधिकारों के सहारे लोकतंत्र में चौथे स्तम्भ खबरपालिका का हिस्सा एक सच्चा पत्रकार बेबाकी से अपनी कलम चलाते हुए विरोध प्रकट करता है और जनसमुदाय के बीच दूध का दूध और पानी का पानी कर देता है। बस यही शब्द झूठ और फरेब की नींव से सरकार में आने वालों को तीर के समान चुभता है। जैसे कर्नाटक बेंगलूर की बेबाक निडर पत्रकार गौरी लंकेश के शाब्दिक तीर से घायल शैतानियत भरे लोगो ने अनैतिक तरीके से मौत के घाट उतार दिया ? इनके खबर,लेख बताया जा रहा अक्सर सत्ता व साम्प्रदायिकता के साथ ही समाज मे झूठ परोस कर मुकाम हासिल करने वालो के लिए भी मुसीबत बन रहे थे। गौरी लंकेश की मौत पर पत्रकार, सामाजिक व राजनेतिक लोगो ने निंदनीय घटना का जमकर विरोध भी किया। जिसके बाद शासन स्तर से जांच भी की जा रही है। अब जरा उन अतिबुद्धिजीवियो की भी बात करें जो गौरी की हत्या के बाद स्वयं के विवेक के अनुसार फेसबुक, व्हाट्सअप सोशल मीडिया पर उबल पड़े। संस्कारो की खदान से निकले लोग हत्या पर प्रशन्नता जाहिर करते हुए घटिया स्तर के शब्दों का प्रयोग कर रहे। जितना गौरी का पत्रकारिता का अनुभव होगा उतनी उम्र का टुच्चा सोशलवीर व्यक्ति सवाल कर बिकाऊ मीडिया, कुतिया, भांड आदि आदि घटिया शब्दो की गंदी मानसिकता से प्रकट करता है। इन चाटुकारों से भी कहना चाहता हूं कि, सवाल करने से पहले खुद के गिरेबां में झांककर संस्कारो की चड्डी कोनसे कोठे पर छोड़ आये ढूंढो ? कहने को तो आदर्श,मूल्यों व संस्कारों की पोटली हो पर खोला तो पता चल रहा सत्ता के लोभ में सिर्फ पाखंडी हो। बात वर्तमान सरकारों की करे तो कल तक विपक्ष में रहते गली, मोहल्ले, चौराहे पर चिल्लाते थे वही वीडियो आज देख लो। कल तक जिन मुद्दों पर तकरार था आज उन्हीं से प्यार है। सरहद तो नही पर हर हद पार की सत्ता के हावसी दरिंदों ने… जांचे होती रहेगी… वाद-विवाद होते रहेंगे… तमाम शैतानियत भरे अनैतिक लोगों को चुनोती देते हुए कहना चाहूंगा कि, तलवार की धार पर चलकर सच लिखा जाता है साहब… झूठ के आधार पर विधान चलाने वाले तुम मौत के सौदागर क्या जानो सच को… इन्हीं शब्दों के साथ घटना की घोर निंदा व पत्रकारिता को सलाम… तुम जिंदा हो गौरी… में भी हूँ… और कई गौरी लंकेश जिंदा है पत्रकारिता जगत में…

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