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ओ.डी.एफ. की गलत जानकारी देने वालों पर सख्त कार्यवाही हो : कलई खुलने से भोपाल का राष्ट्रीय अपमान हुआ घोटाले की भी करें जांच “नेता प्रतिपक्ष श्री अजय सिंह ने केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री को लिखा पत्र”

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भोपाल। नेता प्रतिपक्ष श्री अजय सिंह ने केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर से भोपाल को ओ.डी.एफ. घोषित करने के मामले में गलत जानकारी देने वालों पर सख्त कार्यवाही करने और प्रदेश में स्वच्छ भारत शहरी मिशन में हुए व्यापक भ्रष्टाचार की जांच करवाने की मांग की है। उन्होंने श्री तोमर को लिखे पत्र में कहा है कि भोपाल को ओ.डी.एफ. स्वच्छता में देश में मिले नंबर-2 के स्थान की कलई खुलने से भोपाल का जो राष्ट्रीय अपमान हुआ है इससे यहां के नागरिक आहत हैं।
नेता प्रतिपक्ष श्री अजय सिंह ने केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि 20 अगस्त को भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष श्री अमित शाह भोपाल के वार्ड नं. 26 के सेवनिया गौड़ गांव के आदिवासी समाज के श्री कमल सिंह उइके के घर दोपहर भोज पर जाने के बाद पता चला कि कमल के घर में शौचालय ही नहीं है। उसकी मां सुक्खो बाई ने बताया कि आज भी वह पहाड़ पर शौच के लिए जाती है। यह भी पता चला कि इस एक गांव में 200 से ज्यादा घरों में शौचालय नहीं है और वे सब खुले में शौच जाते हैं। स्वच्छता अभियान की पोल खुलने के बाद नगर निगम भोपाल के अधिकारियों ने दबाव डालकर कमल सिंह के परिवार से एक पंचनामा बनवाकर लिखवाया कि वे अपने भाई का शौचालय उपयोग करते हैं। आनन-फानन तरीके से सेवनिया गौड़ गांव में अस्थायी टायलेट रखवाए गए। जहां टायलेट बने हैं वहां पानी नहीं है। अखबार में खुले में शौच में जाते हुए फोटो भी प्रकाशित हुए हैं। स्वच्छता अभियान में समय-समय पर गड़बड़िया भी सामने आई कि 8 हजार गांवों को गलत तरीके से शौचमुक्त कर दिया । यह भी जानकारी में पाया कि जहां शौचालय बनना बताया गया लेकिन वे बने ही नहीं जिन्होंने बनवा लिया उनको पैसा भी नहीं मिला।
श्री सिंह ने पत्र में लिखा है कि यह मामला अत्यन्त गंभीर है। इसलिए कि एक दिन पूर्व ही भाजपाध्यक्ष श्री अमित शाह ने भारत में स्वच्छ भारत शहरी मिशन में प्रदेश को 427 करोड़ रूपये देना बताया और 143 शहर 17 हजार 616 गांव और 11 जिले को खुले में शौच से मुक्त बताया। कांग्रेस पार्टी ने पहले ही सचेत किया था कि इस पूरी योजना में 1500 करोड़ का घोटाला हुआ है। अगर इसे सिर्फ विपक्ष का आरोप न मानकर जांच करवाई जाती तो शायद भाजपाध्यक्ष के सामने फजीहत न होती।
श्री सिंह ने पत्र में लिखा कि यह भी अत्यन्त गंभीर है कि इंदौर को नंबर-1 और भोपाल को नंबर-2 स्वच्छता में घोषित किया। दोनों जिले खुले में शौच से मुक्त घोषित किए गए। हाल ही के खुलासे से पता चल गया कि भोपाल खुले में शौच से मुक्त नहीं है। नंबर-2 आने पर मुख्यमंत्री जी का भी अभिनंदन समारोह भोपाल में रखा गया पर दो बार कैंसिल हुआ। जिस पर तैयारी में लाखों रूपये खर्च हुए। यह समाचार पत्रों में प्रकाशित हुआ है कि इसमें आने वाले गायक सुखविंदर सिंह को बिना गाए ही 30 लाख का भुगतान किया। इंदौर में भी खुले में शौच मुक्त जिला होने पर नंबर-1 आने पर एक भव्य आयोजन लाखों रूपये खर्च करके किया गया। प्रकृति के प्रकोप के चलते पूरा पांडाल ही गिर गया। कैलाश खेर और एक अन्य गायिका को लाखों रूपये देकर गाना गवाया गया। लिखने वाले को भी मेहनताना दिया गया। प्रचार-प्रसार पर अलग से व्यय हुआ। इंदौर भी क्या वाकई खुले में शौच से मुक्त हुआ है इस पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। राजधानी में अगर स्वच्छता मिशन के यह हालात हैं तो गांव की तो कल्पना ही की जा सकती है। पूरे स्वच्छता मिशन के प्रदेश सरकार की उपलब्धियों पर भी सवालिया निशान लगा है। इसके प्रचार प्रसार और क्रियान्वयन में लगे करोड़ों रूपये के उपयोग में भी घोटाले का संदेह हो रहा है।
श्री सिंह ने कहा कि एक देशव्यापी प्रतियोगिता इसमें हुई पर जिसकी पूरी प्रक्रिया निर्धारित थी। इसमें पूरे देश के कई प्रांत के शहरों, गांवों ने हिस्सा लिया। इनमें से उत्कृष्टता के आधार पर आपने भोपाल का चयन नं-2 पर किया। उसमें कहां चूक हुई कि एक गलत निर्णय भारत सरकार से हुआ। सिर्फ प्रचार-प्रसार के आधार पर ही रैंक दे दी गई | मेरा अनुरोध है कि यह प्रधानमंत्री की उन सर्वोच्च प्राथमिकता वाले कार्यक्रम में शामिल है जिसका गाना तीन साल से गाया जा रहा है। कृपया जो झूठ जनता के सामने उजागर हुआ, भोपाल का जो राष्ट्रीय अपमान हुआ है उसके दोषियों का पता लगाने का दायित्व आपके मंत्रालय का है। कहां चूक हुई किसने गलत जानकारी दी उन लोगों को सामने लाना और सख्त से सख्त कार्यवाही करना जरूरी है।

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