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उम्मीद-13…एसडीएम कुक्षी : डूब प्रभावितों से वचन-पत्र भरवाने वाले के कार्यालय में भरा पानी_*_ईट-पत्थर के सहारे होता कुक्षी बीईओ कार्यालय में प्रवेश_*_पत्रकारों को नसीहत देने वाला ज्ञानचंद एसडीएम गुप्ता अपने गिरेबां में झांके. “इधर की तस्दीक हो गई हो तो ,खुद के नीचे की भी कर ले जनाब”

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-सोमेश्वर पाटीदार-प्रधान संपादक👁

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लो भई… अब क्या कहने डिग्रीधारी ज्ञानी एसडीएम रिशव गुप्ता के, जानना उनसे ही चाहेंगे कि, खुद के नीचे छुपा अंधेरा क्यों नही दिख रहा? पत्रकारों को नसीहत देने वाले अग्गम बुद्धि के आईएएस अधिकारी के एसडीएम रहते हुए स्थानीय स्तर पर स्थित विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी के कार्यालय कुक्षी में प्रवेश करने के बाद के हालात तो क्या बयां करे, पर कार्यालय में प्रवेश करने से पहले ही “नदियां के पार” जैसा लगता है। क्योंकि, यहां पर प्रवेश द्वार पर ही बरसात का पानी भरने से ईंट व पत्थर पानी मे रखे हुए है, उस पर पांव रख कर कार्यालय के अंदर जा सकते है। जानकारी मिली है कि, बीईओ साहब डूब प्रभावित क्षेत्र में खाली करने सम्बंधित वचन-पत्र भरवाने के लिए जाते है, लेकिन यहां खुद का ही कार्यालय पानी से भरा है। दूसरी बात करें तो सरकार स्वच्छता के नाम पर योजनाएं चला रही है, जिसमें करोड़ो रूपये विज्ञापन सहित प्रचार-प्रसार में खर्च कर रही है। और यहां शिक्षा के मंदिर स्कूल संचालित करने वाले विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी के कार्यालय के यह हाल है। भवन के अंदर भी पानी रिसने की स्थिति है। वही पानी भरा होने से मच्छरों के कारण बीमारी को भी न्यौता समझदार लोग दे रहे है। यह तो खुद के नीचे का अंधेरा है जो नही दिख रहा, फिर नगर के अंदर पसरा गंदगी का साम्राज्य कैसे दिखे ज्ञानचंद जनाब को ? अब तो नगर परिषद का भी प्रशासक का चार्ज है। इसीलिए कहते है कि, दुसरो की उम्मीदों पर खरा उतरने की औकात हो तभी उनसे भी उम्मीद की जानी चाहिए। जैसे कि, अनचाही उम्मीद एसडीएम ने पत्रकारों से विगत समय की थी, उनकी उम्मीद पर तो हम भी खरे उतरे पर जनता व हमारी उम्मीदों पर अब तक खरा नही उतरा रिशव गुप्ता। विश्वसनीय सूत्रों से ज्ञात हुआ कि, पत्रकारों के खरे उतरने की तो एसडीएम गुप्ता ने तस्दीक भी की थी पिछले गणतंत्र दिवस के पश्चात ही… जिसमें मुँह की खानी पड़ी। पर सवाल उठता है कि, इतनी उम्मीदें जो कि गई है कभी उन समस्याओं पर तस्दीक कर निजात देने की ओर कदम क्यों नही बढ़ाया ? विभिन्न समस्याओं से जनसामान्य द्वारा अवगत करवाया जाता रहा उसकी तस्दीक कर निराकरण क्यों नही ? फिर कहना चाहूंगा कि, दुसरो से करें उम्मीद तो खुद भी खरे उतरने का मन बना ले दूसरों की उम्मीदों पर… क्योंकि एक बार शुरू करने पर मेरी उम्मीद लंबी होती है… ओके चलते है फिर मिलेंगे नई उम्मीद के साथ…

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