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नवीनता की और एक कदम…

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“चलते-चलते”
“नवीनता की ओर एक कदम”

संजीवनी आज बहुत खुश है, हर आम लड़की की ही तरह उसकी भी इच्छा थी की कोई सपनो का साथी उसके जीवन में आए,वो दिन आया,जब दो अनजान लोग एक सूत्र में बंध गए। फेरे के पश्चात औपचारिक रिती-रिवाज अनुसार दूल्हे को दुल्हन को उपहार देना होता है। उपस्थित सभी रिश्तेदारो की निगाह दूल्हे के हाथों की ओर थी, लेकिन हाथ में तो कुछ भी नही, क्या उपहार मिलेगा संजीवनी को, सब कयास लगा रहे थे, इतने में दूल्हे ने इस सार्वजनिक परम्परा का निर्वहन करने का इशारा करते हुए, संजीवनी का हाथ थाम कर कहा, ” “आज जीवन के सबसे महत्वपूर्ण दिन पर, मै आपको, आपके सपने जो अब आप मेरी आँखों से देखेंगी, उन्हें पुरे करने में जीवनपर्यन्त यथासम्भव सहयोग दूंगा। इससे कीमती कुछ भी नही मिला मुझे मेरा उपहार स्वीकार कीजिये”

मंडप में बैठा प्रत्येक व्यक्ति अपने हाथो को तालियां बजाने से और अपनी बातो में संकल्प की तारीफ़ो के पुल बांधने से नही रोक पाया। संजीवनी ने गर्व से संकल्प का उपहार स्वीकारते हुए,स्वयं को सौभग्यशाली महसूस कर रही थी। सब इस आधुनिक समय के इस बेशकीमती तोहफ़े के विषय में सोच सोचकर प्रसन्नता प्रकट कर रहे थे। किसी सज्जन ने संकल्प से कहा “भाई देखना ये सब बोलने में बहुत अच्छा लगता है, तुम आजकल के बच्चे रिश्तों को निभाना क्या जानो ? जैसे-जैसे समय निकलेगा सब हवा हो जायेगा।”

संजीवनी ने तुरन्त बीच में बात को काटते हुए कहा “अंकल जी रिश्ते विश्वास पर टीके होते है, और आप तो हमारे बड़े है आपको हमारा मनोबल बढ़ाना चाहिए। कैसी भी परिस्थिति हो मै हमेशा इनके साथ खड़े रहूँगी। और मुझे पूरा विश्वास है, मेरी अपेक्षाओं पर ये भी खरा उतरेंगे। बस आप सभी का शुभाशीष ही चाहिए।”

बहुत छोटी लेकिन जीवनोपयोगी बात है, कोई भी रिश्ता आपसी समझदारी और विश्वास पर ही टिका होता है। आज की पीढ़ी के साकारत्मक विचार जीवन को नई सोच के साथ जीने और रिश्तों में आपसी समझ को बढ़ाने का सन्देश दे गए। आइये हम सब भी अपने दैनंदिन जीवन में लोगो के विचारो को सिरे से नकारने की आदत छोड़कर, नवीनता को अपनाए…

श्रीमति माला महेंद्र सिंह,
एम एस सी, एम बी ए, बी जे एम सी,
सामाजिक कार्यकर्ता,
94795-55503
Vandematram0111@gmail.com

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