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मेधा का अनशन समाप्त : जश्न मनाओ मोदी-शिवराज_*_सरकारी मशनरी का गिरोह के रूप में दुरुपयोग …सत्ताई मंशा से छोटे कर्मचारी/अधिकारी प्रताड़ित नही हो रहे क्या ? _बड़ा बलवान है ये वक़्त गुजर जाएगा…कई आये थे तुम भी चले जाओगे_ “सरकार की क्रूरता पर भारी डूब प्रभावितों को प्रकृति का साथ…”_*_वो मन से…ये दिल से…नोटंकी में अव्वल

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✍🏽सोमेश्वर पाटीदार-प्रधान संपादक👁
📞9589123578

*✒…खड़ी कलम…*
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*नर्मदा* बचाओ आंदोलन की नेत्री सुश्री मेधा पाटकर सहित साथी कार्यकर्ताओ से सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अनुरोध कर गत दिवस निम्बू पानी पिलाकर अनशन समाप्त करवाया। लोकतांत्रिक व्यवस्था संभालने वाली सरकार से अपनी जायज़ मांगो को लेकर गुहार लगाई जाती रही फिर भी सत्ता के गुरुर में कोई सुनवाई नही की गई। जब गांधीवादी रास्ता अख्तियार किया जाकर सरदार सरोवर बांध के डूब प्रभावितों के साथ सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर अनिश्चितकालीन अनशन पर माँ नर्मदा की गोद धार जिले के कुक्षी तहसील के ग्राम चिखलदा में बैठे तो सरकार की आंखों में यह अहिंसक अनशन(उपवास) खटकने लगा। जैसे अनशन का समय बढ़ता जाता वैसे ही शिवराज की धड़कने बढ़ती जाती है। प्रयास किया सरकार ने पर, कोनसा… किसी भी तरह यह अनशन समाप्त हो क्योंकि पोल खुलने से सरकार की अब तक जो ढकी थी वह उगाड़ी हो रही थी। चलते अनशन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने चाटुकारों ओर उसमे छुपे दल्लों से भोपाल बुलाकर बात करता रहा और घोषणा करता रहा पर वोट की भीख मांगने के लिए गली-गली घूमने वाले मुखिया के पास अनशन स्थल पर आकर संवाद करने का वक़्त नही मिला। अनशन का वक़्त बढ़ता जाता है और अनशनकारियों की तबियत भी बिगड़ती जाती है। देश भर में आंदोलन के समर्थन में सामाजिक कार्यकर्ताओं व राजनीतिक दलों के आगे आने से शिव सत्ता हिलने लगी। तब सरकारी मशनरी का इस उपवास को समाप्त करने के साथ ही बढ़ते दबाव को रोकने के लिए एक गिरोह जैसा स्तेमाल कर दुरुपयोग किया जाता है। कल तक डूब प्रभावितों को कुक्षी,धार, भोपाल,दिल्ली में अपने आसपास भटकने न देने वाले शासन-प्रशासन को अनशन के 12 दिन होने पर मेधा व साथियो के स्वास्थ्य की चिंता इतनी होती है कि, सेकड़ो पुलिस बल के साथ अनशन स्थल पर बलपूर्वक खदेड़ते हुए जबरन मेधा सहित 10 को उठा कर धार,इंदौर हॉस्पिटल ले जाया जाता है, वहां निजी हॉस्पिटल में मेधा पाटकर का उपचार करवाने से तब उनका अनशन तो नही पर उनका संकल्प था निजी अस्पताल में उपचार नही करवाने का वह तोड़ दिया और शासकीय हॉस्पिटल का दिवालियापन भी खुद सरकार ने उजागर कर दिया था। जिसके बाद विभिन्न प्रकरण दर्ज को लेकर षड्यंत्र पूर्वक मेधा पाटकर को गिरफ्तार भी कर लिया जाता है और जेल में डाल कर अपनी क्रूरता का सरकार खुद परिचय दे देती है। इतना ही नही मेधा सहित आंदोलन को ऊर्जा देने वाले कर्मठ कार्यकर्ताओं पर आंदोलन को कमजोर व खत्म करने हेतु गंभीर धाराओं में झूठे प्रकरण दर्ज कर लिए जाते है। विभिन्न धाराओं में नामजद जितने उस दिन अनशन स्थल पर उपस्थित नही थे उससे भी ज्यादा करीब 2500(ढाई हजार) लोगो पर प्रकरण दर्ज कर लिया जाता है। हत्या के प्रयास की धारा-307 का दुरुपयोग इतने लोगो पर करते हुए सरकारी तंत्र ने खुद को एक अपराधी गिरोह साबित कर दिया। साम-दाम-दण्ड-भेद कैसे भी अनशन को समाप्त करने की शासन की मंशा ने बलपूर्वक करवाई इस कार्यवाही से निर्दोष आंदोलनकारी ही नही, निर्दोष पुलिसकर्मी भी घायल होकर शिकार हुए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकारें अपनी नाकामीयों को छुपाने के लिए इस हद तक चली जाए तो यह तानाशाही सरकार देश के लिए खतरनाक है? में पूछना चाहता हूं मोदी-शिवराज से क्या अनशन समाप्त होने से समस्या का निदान हो गया? नर्मदा घाटी में वर्षा के कम होने से प्रकृति भी डूब प्रभावितों के साथ है, इस स्थिति में तवा डेम, बरगी डेम, ओंकारेश्वर डेम, इंदिरा सागर का पानी छोड़कर इनको डुबाते हुए मोदी के सामने फूलसिंह बनोगे क्या ? अब तक व्यवस्था नही बन पाई तो सच स्वीकारने में क्या बुराई ? समय बढ़ाकर आदर्श पुनर्वास करने की ओर कदम क्यो नही बढ़ाते ? जिसमें डूब प्रभावित को ठूसने वाले हो व अस्थाई पुनर्वास निर्माण में भृष्टाचार नही हो रहा क्या ? तुम्हारी हठधर्मिता के कारण कई कर्मचारी व अधिकारी शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित नही हो रहे क्या ? अफसोस इन सारे सवालों से तुम्हे सरोकार नही, तुम तो सत्ता बनाने बिगाड़ने में ही इतने लीन हो कि, मानवता किस खेत की मूली है समझ नही आता। पर अब तो मेधा सहित डूब प्रभावित भी अनशन समाप्त कर चुके मस्ती करो… जश्न मनाओ… साथ ही इतना जरूर याद रखना अनशन समाप्त कर देने भर से आंदोलन समाप्त नही हुआ। और भी बड़ी मजबूती के साथ जायज़ मांगो को लेकर यह आंदोलन आगे भी जारी रहेगा…

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