Home इंदौर डूबना ही था तो शौचालय निर्माण में करोड़ों रुपये बर्बाद क्यों किये...

डूबना ही था तो शौचालय निर्माण में करोड़ों रुपये बर्बाद क्यों किये सरकार…? : निसरपुर ब्लॉक के ही लगभग 2200 शौचालय डूब में तो, पूरे डूब क्षेत्र के आंकड़े देखो सरकार… “डूब का बहाना भिड़ाकर दूसरी सुविधा से नकारते रहे,फिर इसमें जनता के करोड़ो क्यों फूंके?” ^पुनर्वास पर यही हितग्राही पुनः लाभ लेने हेतु पात्र होगा…?

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✍🏽सोमेश्वर पाटीदार-प्रधान संपादक👁
📞9589123578

✒…खड़ी कलम…
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ये क्या सरकार… तुम करो तो जायज हम करें तो ना-जायज़… जनता की मेहनत की कमाई से जमा सरकारी खजाने में माल को तुम पलक झपकते ही उड़ा डालो… हर बात का जनता से हिसाब लेने वाली सरकार व उसके कागज पर आंकड़े बाजी करने वाले एसी बंगले में बैठे अधिकारी इस करोडों की बर्बादी का हिसाब देंगे…? सरदार सरोवर बांध से प्रभावित क्षेत्र में धार जिले के सबसे बड़े ग्राम निसरपुर अवाम ने बताया कि, 2-3 माह पूर्व स्वच्छता मिशन के अंतर्गत शौचालयों का निर्माण किया गया जिसमें 12000 हजार प्रति शौचालय 2 किस्तों में दिए जाते है। बताया गया किसी-किसी के तो अधूरे रुपये प्राप्त हुए। शासकीय सूत्रों के अनुसार डूब क्षेत्र में होने से निसरपुर विकास खंड के गांवों में लगभग 2200 (दो हजार दो सौ ) शौचालय डूब में जा रहे है। इन शौचालयों की कीमत 12000 हजार प्रति शौचालय से लगभग 2,64,00000 ₹ (दो करोड़ चौसठ लाख रुपये) होती है। सिर्फ निसरपुर ब्लॉक के डूब रहे शौचालयों में इतनी राशि है तो आकड़ो के जादूगर ये बताए कि, क्या मनावर,धरमपुरी,बड़वानी,अलीराजपुर क्षेत्र में आने वाले डूब क्षेत्र सहित सभी डूब क्षेत्र में शौचालय निर्माण कर डूबने से करोड़ों रुपये बर्बाद नही हुए क्या…? सरकार व उसके नुमाइंदों ने तो मनमर्जी से जब जैसा चाहा जनता के धन की बे-परवाह बर्बादी कर डाली। जबकि जनता इसी डूब क्षेत्र में अन्य सुविधाओं की दरकार करती थी तो, डूबने की बात दोहराते हुए पल्ला झाड़ लेते थे। जनता मांगे तो बर्बादी का बहाना और खुद सरकार व उसके दल्लों को बर्बादी की पूरी छूट। बड़ा सवाल यह भी है कि, इन्हीं हितग्राहियों को पुनर्वास के पश्चात पुनः इस योजना का लाभ मिलेगा या एक बार देकर लाभान्वित बताकर हाथ ऊंचे…? एक और उदाहरण पेश करते हुए बनाकर बिगाड़ने वाला कारनामा कुक्षी नगर का ही है। अलीराजपुर रोड़ पर पट्टाधारी आदिवासी मजदूर का मामला जब न्यायालय में चल रहा था और प्रशासन उसकी झोपड़ी को हटाने पर आमादा था तो, सवाल यह है कि, इसे स्वच्छता मिशन का लाभ देते हुए शौचालय क्यो बनवाई ओर बनवाई तो खुद प्रशासन ने ही इसकी झोपड़ी के साथ उस शौचालय को क्यों तोड़ा…? इसी प्रकार क्या कई मामलों में सरकार व उसके लोग जनधन की बर्बादी नहीं करते होंगे क्या…? आखिर क्यों नंबर बढ़ाने के चक्कर मे अधिकारी सच को दबाने का दुस्साहस करता है…? मनमानी पर उतारू होकर अवाम की आवाज़ को क्यों दबाना चाहता है…? तुम डिग्री लेकर बैठे हो पर दो जून की रोटी तो ये भी खाते ही है। क्यों डूब क्षेत्र की अवाम से संवाद से दूरी बनाए बैठे हो…? ओके फिर मिलेंगे नए मुद्दे को लेकर बहुत ही जल्द खड़ी कलम के साथ…

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