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पाटीदार “किसान” अधिवेशन की तारीख नजदीक आते ही सरकार की बड़ी धड़कन : समाज के लोगो को लुभाने व दबाने में लगे सरकार व उसके दल्ले __सत्ता की विदाई से भयभीत शिवराज साम-दाम-दण्ड भेद पर उतारू “मंदसौर के नारायणगढ़ में 16 को होगा प्रांतीय अधिवेशन”

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✍🏽सोमेश्वर पाटीदार-प्रधान संपादक👁
📞9589123578

*✒…खड़ी कलम…*
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इनदिनों म.प्र. की शिव सरकार मंदसौर का नाम ओर वो भी किसान सुनते ही हरकत में आ जाती है। कल तक जिन पाटीदार समाज के पदाधिकारियों व किसानों से मिलने की ओर बैठकर बात करने की फुरसत नही थी वह सरकार आज सोने के लिए तैयार है। मंदसौर कांड से पाटीदार किसान भाइयों को खो देने व आज भी किसान भाइयों को प्रताड़ित करने से आक्रोशित पाटीदार समाज के पदाधिकारियों ने प्रांतीय अध्यक्ष महेंद्र पाटीदार की अध्यक्षता में एकजुट होकर 16 जुलाई को मंदसौर जिले के नारायणगढ़ में पाटीदार अधिवेशन को किसान सम्मेलन के रूप में आयोजित करने का निर्णय लिया तब से ही शिव सरकार की धड़कने बढ़ने लगी व फफड़ने लगे। क्योकि यह अधिवेशन सिर्फ पाटीदारों का नही समस्त अन्नदाता किसान भाइयों आन-बान-शान को लेकर ढोंगी सरकार को उखाड़ फेंकने की ओर बढ़ रहा है। लगातार नितनये भजन गाकर जनता को भावनात्मकरूप से वोटबैंक बनाये रखने वाले पाखंडी का पाखंड उतरने लगा तो बताया जा रहा साम-दाम-दण्ड-भेद पर उतारू हो गया? किसान सम्मेलन रूपी पाटीदार समाज प्रांतीय अधिवेशन में हार्दिक पटेल का आना तय व बिहार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी देवगौड़ा के आने की भी पूरी संभावना है। जिसकी तारीख 16 जुलाई नजदीक आते-आते ही पाटीदार समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों पर शिवराज डोरे डालने लगे। सत्ता की विदाई के भय से शिवराज नही चाहते कि, हार्दिक पटेल सहित आमंत्रित नेता आये व अधिवेशन सफल हो। नाम न छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि, सत्ता के दल्लो द्वारा सहयोग करने के बदले में विभिन्न लाभ के पद या सीधे-सीधे लाभ देने की पेशकश कर लुभाने का प्रयास कर रहे। उक्त पदाधिकारी ने यहाँ तक पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि, मुझे जान का भी खतरा है। सरकार इतनी दबाव में आ चुकी की विधायको व संगठन पदाधिकारी सहित पाटीदार समाज के कुछ बन्धवे चाटुकारो के सहारे अधिवेशन कमजोर करने के लिए प्रयासरत है। में कह देना चाहता हूं उन बंधवा चाटुकारो से की वक़्त आने पर सत्ता तुमको भी ठिकाने लगा देगी इसलिए संगठन में शक्ति है और अकेले में दुखती है जैसे हालात ना-समझी में कर लोगे। निश्चित रूप से शांतिपूर्ण आंदोलन करने वाले किसानों पर गोलीबारी कर मौत के घाट उतारने वाली सरकार किसी भी हद तक सत्ता सुंदरी को बचाये रखने व पाने के लिए जा सकती है। क्यों न कहूँ इस सरकार की मानवता मर चुकी? लोकतंत्र का गला घोंट चुकी? तानाशाही पर उतारू हो चुकी? गुंडे-बदमाशों की कठपुतली बन चुकी? जनकल्याण के नाम पर योजनाओं में घोटाले ही नही महाघोटाले कर चुकी? भाजपा के कर्मठ लोगो को उपेक्षित कर धंधेबाजों की रखेल बन चुकी? आदर्श,मूल्यों व संस्कारो की बलि चढ़ाकर ये कोनसा रूप धारण किया? घड़ा भर चुका बहुत हुआ मामा अब किसान और आमजन नही बनेंगे मामू…। खामोश आवाज़ भी बहुत कुछ सिखाती है शिवराज…दबाने का दुस्साहस न करो… सुनो, ओर समझो उस पर भी कुछ करो। फिर वक़्त गुजर जाएगा और कल कभी होता ही नहीं… मेरे लिखने से किसी बन्धवे को तकलीफ हो तो वह खुद गिरेबां में झांके उसके बाद मेरे खिलाफ सोंचे… चलते है फिर मिलेंगे खड़ी कलम के साथ…

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