Home Video दम तोड़ते पौधे चीख रहे म.प्र.सरकार का पौधरोपण बना महाघोटाला : _सप्ताह...

दम तोड़ते पौधे चीख रहे म.प्र.सरकार का पौधरोपण बना महाघोटाला : _सप्ताह भर में सिद्ध हुआ पौधों की हत्यारी शिव सरकार_ “रिकार्ड के लिए आंकड़ों की बाज़ीगरी में भी हुआ बड़ा धोखा”__एसडीएम गुप्ता जाते रोजाना पुनर्वास, मृत पौधे नही दिख रहे?

597
29
SHARE

✍🏽सोमेश्वर पाटीदार-प्रधान संपादक👁

📞9589123578

*✒…खड़ी कलम…*
“””””””””””””””””””””””””””””

*सत्ता के दल्लो* ओर हराम की हरियाली में पलने वाले पाखंडियों की खुल गई पोल…जी हां हम बात कर रहे उस म.प्र. सरकार के मुखिया शिवराज सिंह चौहान व उनकी अगुवाई में किये गए गत 2 जुलाई को नोटंकी भरे पौधरोपण महाअभियान को कुछ उनके तरीके से अंजाम देने में सहयोग करने वाले प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से भृष्ट,चाटुकार लोगो की। 2 जुलाई को ही हम लिख चुके थे कि, रिकार्ड के नाम पर 6 करोड़ पौधे एक ही दिन में सिर्फ आकड़ो की बाजीगरी के साथ कागज पर ही होगा। हमने महाघोटाले को अंजाम देने की ओर यह कदम बताया था। क्योंकि एक दिन के बजाय 10 दिन में भी पौधरोपण हो सकता था, ज्यादा के बजाय कम संख्या में भी पौधरोपण हो सकता था। पर ऐसा नही किया। फलस्वरूप कही देर से पहुँचे तो कहीं सूखे पौधे ही भेजे गए। मकसद साफ जाहिर हो रहा था कि, पौधे जीवित रखने से ज्यादा रिकार्ड व फोटो खिंचवाने को महत्व दिया जा रहा था। किसान आंदोलन व डूब प्रभावितों के आंदोलन से कुर्सी खोने के भय से शिवराज फिर भावनाओं में बहाकर सुरक्षित रहना चाहते थे। साथ ही इसके नाम पर महाघोटाले को भी अंजाम देना चाहते थे? जिसकी सच्चाई चीख-चीख कर सप्ताह भर में ही दम तोड़ते पौधे बयां कर रहे। नर्मदा सेवा यात्रा के दौरान पौधरोपण के संकल्प की बात करने वाले शिवराज…आश्चर्य होता है कि, नर्मदा की गोद मे बसे ग्रामीण क्षेत्र में ही पौधे दम तोड़ रहे। वह भी धार जिले के कुक्षी तहसील के ग्रामीण क्षेत्र में जहां सरदार सरोवर से डूब प्रभावित होने से सरकार का भारी भरकम अमला स्थानीय के अतिरिक्त लगा हुआ है। पुनर्वास पर तो ज्यादा गंभीरता दिखानी चाहिए इस ओर लेकिन वहां तो लगभग सभी पौधे मर चुके । सवाल यह उठता है कि, क्या सभी जिम्मेदार एसी वाहन में बैठकर ही चक्कर लगा रहे? और खासकर सवाल स्थानीय स्तर पर एसडीएम आईएएस अधिकारी और वह भी ज्ञानचंद रिशव गुप्ता से है कि,क्या पुनर्वास क्षेत्र में रोजाना जा रहे तो यह पौधे नही दिखाई दे रहे या नजरअंदाज कर रहे? या उस पुनर्वास स्थल पर ही नही जा रहे जहां 31 जुलाई तक खाली करवाने की तलवार लटकी है? 2 जुलाई को पौधरोपण महाअभियान में फोटो खिंचवाकर सप्ताह भर में पौधों को भूलने वाले व किसी अन्य खबर पर बेबुनियाद कमेंट्स कर ज्ञान बघारने वाले एसडीएम किये गए सवालों के भी जवाब देंगे? जहाँ पौधे लगाए थे वहां पलट कर तो देखो जनाब ओर नही तो में फोटो व वीडियो भी खबर के साथ पोस्ट कर रहा हूँ,कागज से उतर कर जमीनी हकीकत देखिए। नर्मदा सेवा यात्रा, उपवास से उपहास, ओर अब इस पौधरोपण को महाघोटाला क्यो न कहे शिवराज? पौधरोपण से पहले उन्हें जीवित रखने व संरक्षण के इंतजाम होते तो कंगाल सरकार पर अतिरिक्त कर्ज का भार नही पड़ता ओर पड़ता भी तो उसका सदुपयोग होता दुरुपयोग नही। पर्यावरण के प्रति नजरिया साफ होता तो कई तरीके थे पर्यावरण संरक्षित करने के। परन्तु अफसोस शिवराज को जनता के धन बर्बादी की नही सत्ता की चिंता सता रही है। इसीलिए आमजन में तो अब तुम्हारी उगाड़ी होने ही लगी पर में सिर्फ शिवराज को एक नोटंकीबाज के साथ ही धर्म व जनसेवा के नाम कुर्सी हेतु जनसामान्य की भावनाओ से खेलते हुए छलने वाला छलिया की दृष्टि से देख रहा हूँ। गिरेबान में झाँको ये वक़्त गुजर जाएगा…

LEAVE A REPLY