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आदर्श पुनर्वास को लेकर जिम्मेदार गंभीर नही,शब्दो के तीर ओर कागज पर खिंच रहे विकास की लकीर : जिम्मेदारों का टाइम-पास अंत मे पुलिस के लिए बनेगा मुसीबत, इनके माथे फुठेगा ठीकरा_ _पशुओं का शेड : कलेक्टर मुगालते में काम चल रहा और ठेकेदार को पता नही उसे यह काम करना_ “एसडीएम रिशव गुप्ता क्या देख रहा,चले कम हांफे ज्यादा”

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✍🏽सोमेश्वर पाटीदार-प्रधान संपादक👁

📞…9589123578

*✒…खड़ी कलम…*

*निसरपुर से लौटकर…*सरदार सरोवर डूब प्रभावितों के साथ सुप्रीम कोर्ट को झूठी रिपोर्ट देकर पूर्व में ही सरकार एक तो बड़ा धोखा दे चुकी है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले में डूब क्षेत्र के लोगो को हटाना तो है, लेकिन उनका आदर्श पुनर्वास भी किया जाए यह भी सुप्रीम कोर्ट कह चुकी है। पर सरकार हटाना शब्द को तो गंभीरता से ले रही लेकिन आदर्श पुनर्वास की बात पर “शब्दो के तीर ओर कागज़ पर विकास की लकीर” जैसी स्थिति है। आदर्श पुनर्वास की स्थति स्पष्ट कर दूं कि, गत दिवस धार कलेक्टर श्रीमन शुक्ल शासकीय अमले के साथ निसरपुर भृमण पर आये। यहां उन्होंने करवाये जा रहे विभिन्न कार्यो के सम्बंधित ठेकेदारों व अधिकारियों से चर्चा की। पुलिस बल को रुकवाने को लेकर भी चर्चा की। साथ ही आश्चर्य जनक स्थति तब बनी जब शासन द्वारा डूब प्रभावितों के निवास हेतु बनाये जा रहे वैकल्पिक टीन-शेड के ठेकेदार से कलेक्टर जानकारी ले रहे थे। जब ठेकेदार से डूब प्रभावितों के पशुओं के शेड की स्थति पूछी तो ठेकेदार बोला मुझे नही पता ये में नही बना रहा, जगह जरूर छोड़ दी। तब कलेक्टर ने सम्बंधित से कॉल कर उपस्थित ठेकेदार से भी चर्चा करवाई तब स्पष्ट हुआ कि, यह काम भी इस ठेकेदार को करना है। अब सारे शेड, पशुओं सहित निवास हेतु 15 जुलाई तक बना दिये जायेंगे यह बात भी दावे के साथ कलेक्टर को ठेकेदार ने बताई। जबकि 10 दिन ही शेष बचे आज 5 जुलाई हो चुकी। विचारने की बात यह भी है कि अगर कलेक्टर नही आते तो पशु सेड अ-धर में थे। कलेक्टर तो रोजाना नही जा रहे पुनर्वास पर लेकिन आईएएस कुक्षी एसडीएम रिशव गुप्ता तो रात-दिन एक करने की बात करते है क्या चक्कर लगाकर टाइम पास करके ही वापस आ जाते है। कलेक्टर को रिपोर्ट फिर क्या भेज रहा है ये ज्ञानचंद? धरातल पर कार्यो की स्थति देखे तो सड़कों के नाम पर चुरी बिछा दी व कुछ ही स्थानों पर डामरीकरण का दिखावा दिखाई दे रहा। बिजली के खंभे आड़े-टेढ़े ओर गुणवत्ताविहीन कार्य दिख रहा। शासकीय खंडर होते भवनों पर पुताई करवाकर चमका दिया गया। व्यापार हेतु बाजार का ठिकाना नही, मंदिरों हेतु अब तक जमीन नही ओर अधिकारी महाराज से बोलते चबूतरे व तंबू में भगवान को रखो। काम के साथ ही पुराने आशियाने को छोड़कर जाने वाले लोगो से जहां प्रेमपूर्वक बात कर बीच का रास्ता सुलझाना चाहिए। वहीं नो-सिखिये अधिकारी प्रशानिक रोब दिखाकर धमकाने व अड़ियल रवैया अपना कर तानाशाह की तरह पेशा रहा है। क्या इसे आदर्श पुनर्वास कहे मोदी को खुश करने के लिए राज्य की जनता को प्रताड़ित कर बलि चढ़ाने वाले शिवराज ? एनव्हीडीए के महाभृष्ट अधिकारियों के कुकर्मो से उत्पन्न हुए आज के हालातों के बाद आदर्श पुनर्वास हेतु जिन एजेंसी या विभाग की जिम्मेदारियां है वह सिर्फ यहां चक्कर लगाकर टाइमपास कर रहे है और यही टाइम पास पुलिस की आने वाले दिनों में मुसीबत बनेगा। क्योकि समय रहते जिम्मेदार कागजी घोड़े दौड़ा रहे है ओर जब गले-गले आ जायेगी तो निर्दोष पुलिस विभाग के लोगो को निपटने के लिए अंत मे आगे कर देंगे। डूब पीड़ित की आज सुनवाई नही होने पर आने वाले समय मे जो सामने आएगा उससे मजबूरन बहस या विवाद उत्पन्न होगा। क्योंकि जिन्होंने करा-धरा वो एसी में बैठ कर रिजल्ट लेंगे और मैदान में पुलिस…। इतनी सारी विसंगतियों के बावजूद सरकार लोकतंत्र की हत्या व मौलिक अधिकारों का कानून का दुरुपयोग कर गला क्यो घोटना चाहती है? सत्ता की हवस इन पाखंडी सरकारो पर व उसके चाटुकारों पर इस कदर चढ़ी हुई है कि, यह दिन को रात कहे तो रात व रात को दिन कहे तो दिन… उम्मीद करता हूँ सत्ता के हवसखोरो से कि, कम से कम बीच का रास्ता न्यायसंगत निकाले ताकि, मौलिक अधिकारों के साथ ही लोकतंत्र जिंदा है ऐसा भी तो लगे…

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