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किसान संदेश यात्रा: फिर मामू बनाने आ रहे शिवराज : लगातार हो रही खुदकुशीयां ओर ये जनता के धन की बर्बादी कर नोटंकी में लगे “भावनाओं में न बहे किसान, जब देने की बारी आई तो भड़क गई और बह गया खून” __ चिंतन करें किसान…यात्रा का स्वागत… हो या बहिष्कार…

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✒खड़ी कलम…
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प्रदेशवासियों… स्वागत के लिए तैयार हो जाओ…फिर मामू बनाने लगातार कृषि अवार्ड लेने वाले व ख़ुद को किसान पुत्र कहते नही थकने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान किसान संदेश यात्रा लेकर बूथ स्तर तक आ रहे है। क्योंकि चुनाव आने वाले है। पाखंडी यह संदेश देगा यात्रा के माध्यम से कि, जनकल्याण में कितनी योजनाएं चलाई जा रही व जनहित, किसानहित में क्या-क्या किया है। जनता के सरकारी खजाने में जमा धन को बे-परवाह खुद के गुणगान में लगाने के बजाय धरातल पर जनहित में खर्च करना चाहिए। परन्तु, मंदसौर जैसे अनंत निंदनीय सरकार के कृत्य से उत्पन्न हुए किसानों के जख्मों पर मलहम लगाने आ रहे, जबकि यह मलहम कम नमक ज्यादा प्रतीत हो रहा। शिवल्या जानता है कि, सरकारी मशनरी का तो जमकर फायदा उठाएंगे ही, साथ ही गोलियों ओर खुदकुशीयों से मरे किसानों के खून के दाग जो खुद की छबि पर लगे है उनको धोने में भाजपा के ज्यादा, किसानों के कम किसान नेता भी उपयोग में अच्छे से आ जाएंगे। सनद रहे मंदसौर कांड के दौरान प्रदेश में फैलती अशांति का बहाना भिड़ाकर करोड़ो खर्च कर “उपवास” नामक नोटंकी की थी, जिस पर से पर्दा उठा तो पता चला था उपवास नही यह तो जनता व किसानों का उड़ाया “उपहास” है। उस वक़्त राजनीतिक उठापठक में कुर्सी खोने का भय था और अब आगामी चुनावों को देखते हुए फिर से कुर्सी पाने यानी बनी रहने का । फिर क्या जनता को भावनाओ में बहाने के लिए फिर मामा शिवराज मामू बनाने के लिए निकल गए। क्योंकि, शिवल्या को जनता की नही सत्ता की चिंता है सत्ता सुंदरी के रूठने का भय सताने लगा अभी से तो चल दिये मुँह उठाकर नई नोटंकी लेकर जनता के बीच…तो निवेदन मेरा जन सामान्य व किसानों से है कि, अपनी-अपनी भावनाओं को संभाल कर रखें शिवराज के भावुक शब्द सागर व उनके बंधवा लोगो की शब्द यात्रा से भी अपनी भावनाओं को बचाकर रखें। सर्वविदित है कि, मामा लेते समय तो भावुक करके भावनाएं बहाकर ले जाते और देते समय खुद का अधिकार मांगने पर मंदसौर कांड जैसे किसानों पर भावनाएं भड़का देते और किसानों की भावनाओ को समझने के बजाय किसानों का खून बहाया गया।

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