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जस्टिस कर्णन मामले में आपका फैसला कहा है मिलार्ड ? : न्यायपालिका में भ्रष्ट जजों की शिकायत की सजा भुगत रहे कर्णन ?

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नई दिल्ली।कोलकाता हाईकोर्ट के पूर्व न्यायधीश सीएस कर्णन इस समय जेल में हैं। कर्णन पर जजों की शिकायत करने के मामले में न्यायालय की अवमानना का केस चल रहा है। रिटायर होने के करीब सप्ताह भर बाद ही उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया, लेकिन इस मामले का फैसला सुप्रीम कोर्ट की साइट पर अभी तक उपलब्ध नहीं कराया गया है।
कर्णन मामले पर मुखर रुप से सोशल मीडिया पर लिख रहे वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल ने लिखा है….
सुप्रीम कोर्ट ने एक लाइन में जस्टिस कर्णन को दोषी क़रार दिया और उन्हें सज़ा सुना दी। लिखा कि पूरा फ़ैसला बाद में आएगा। यह 9 मई को हुआ।
वह फ़ैसला कहाँ है? 40 दिन से ज़्यादा हो गए। देश को पता तो चले कि जस्टिस कर्णन का अपराध क्या है?
कई वकीलों का मानना है कि वह फ़ैसला कभी नहीं आएगा। क्योंकि उसमें लिखना पड़ेगा कि जस्टिस कर्णन ने अपनी शिकायत में लिखा क्या था।
यह न्यायिक इतिहास का पहला आदेश है, जिसमें जजमेंट लिखा ही नहीं गया।

क्या है कर्णन मामला…?

दरअसल कोलकाता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश सीएस कर्णन ने 23 जनवरी 2017 को पीएम मोदी को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने 20 जजों की शिकायत की थी। पीएम मोदी के भेजे गए शिकायती में कर्णन ने नोटबंदी के कदम को सराहते हुए लिखा था कि…
आदरणीय प्रधानमंत्री जी,
नोटबंदी लागू किए जाने के बाद अधिकृत अधिकारियों द्वारा देशभर से अवैध धन जब्त किया जा रहा है और इसके जरिए भ्रष्टाचार कम किया जा रहा है। लेकिन देश की न्यायिक प्रणाली में बिना डर के मनमाने तरीके से बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हो रहा है। मैं आपको नाम सहित भ्रष्ट जजों की एक सूची सौंप रहा हूं। इसमें कर्णन ने 20 जजों के नाम लिखे थे। इसके अलावा कर्णन ने तीन और लोगों के नाम इस पत्र में लिखे थे।

जस्टिस कर्णन ने PM से की थी जिस जज के भ्रष्टाचार की शिकायत, उन्हीं को सौंपा उनका केस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई की बात करते रहे हैं। शायद इसीलिए कर्णन को उम्मीद थी कि इस पत्र के जरिए पीएम न्यायपालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार पर भी ध्यान देंगे। लेकिन नतीजा उलटा ही हुआ और सुप्रीम कोर्ट के जजों ने इसे न्यायालय की अवमानना माना। उन्हें सजा सुना दी और रिटायर होने के चंद दिनों बाद ही जेल भेज दिया गया।

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