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सड़कों पर चल रही आंगनवाड़ीयाँ, ओर चलाया जा रहा “आंगनवाड़ी चलो अभियान” : 200 रूपये माह में आंगनवाड़ी के लिए भवन कैसे उपलब्ध हो? “जिला कार्यक्रम अधिकारी नीलू भट्ट की लापरवाही, जिले में केंद्र बंद होने की कगार पर”

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कुक्षी।सरकार की नीति व विसंगतियों की वजह से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओ को आये दिन समस्याओ का सामना करना पड़ रहा है। धार जिले के कुक्षी महिला एवं बाल विकास विभाग परियोजना के अंतर्गत आने वाले आंगनवाड़ी केंद्रों सहित जिले भर में कई स्थानों पर सड़क पर ही आंगनवाड़ी केंद्र संचालित करते हुए आंगनवाड़ी चलो अभियान चलाया जा रहा।

*वार्ड-13 सहित केंद्रों में जन्मदिन मनाया*

जिले भर में तो हालात खराब है पर हम बता रहे एक नमूना कुक्षी परियोजना के वार्ड-13 बुरहानी कालोनी में भवन के अभाव में सड़क पर ही दिनांक 15 जून से 30 जून तक आंगनवाड़ी चलो अभियान व सुपोषण के तहत द्रुवा मोदी का जन्मदिन मनाया गया। केक काट कर सभी ने बधाई दी। इस अवसर पर केक सहित सारी व्यवस्था के साथ द्रुवा के पालक सपना, हितेश मोदी,सहित बच्चे मौजूद थे।

*पूर्व में भी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कर चुकी शिकायत, जिम्मेदार सो रहे*

पूर्व में समस्याओं को लेकर कार्यकर्ताओ ने कुक्षी एसडीएम कार्यालय पहुँच कर ज्ञापन सोपा और साथ ही जिला कार्यक्रम अधिकारी धार, कलेक्टर धार, संभाग आयुक्त इंदौर, मंत्री महिला एवं बाल विकास विभाग भोपाल को भी प्रेषित किया। जिसमें बताया गया कि, आंगनवाड़ी केंद्रों को भवन किराया हेतु अप्रेल 2016 से जून 2016 (मात्र 3 माह) तक 750 रूपये प्रतिमाह के अनुसार भुगतान किया गया था। जिसके बाद माह ऑक्टोम्बर 2016 से घटाकर 200 रूपये प्रतिमाह ही भवन किराया दिया जा रहा है। जबकि शहरी क्षेत्र में 200 रूपये माह में भवन उपलब्ध होना संभव ही नही। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता खुद राशि मिलाकर भवन किराया देती है या कही पर मकान मालिकों को किराया नही चूका पाने से खाली करने की नोबत आ रही। कुछ केंद्र बंद हो रहे है, तो कुछ बन्द होने की कगार पर है। कही जगह खुले में मजबूरन बच्चो को बिठाना पड़ रहा। भवन का नियमानुसार फोटो व नक्शा सहित जानकारी पर्यवेक्षक व स्थानीय कार्यालय के माध्यम से वरिष्ठ कार्यालय तक पंहुचा दी गई। लेकिन आज दिनांक तक जिला कार्यक्रम अधिकारी नीलू भट्ट की लापरवाही के चलते नवीन किराया निर्धारण नही होने से मात्र 200 रूपये ही किराया मिल रहा। ऐसे हालात में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं की मेहनत व लगन से सुचारू रूप से केंद्र संचालित करने के सपनो पर भी पानी फिर जाता है व खुद को हतोत्साहित महसूस करती है।

*सरकार की मंशा पर सवाल*

शासन चाहती है कि, आंगनवाड़ी में झूले, वजन मशीन, पोषण कार्नर, उदिता कार्नर, स्तन पान कार्नर, रिकार्ड संधारण व पानी की व्यवस्था के साथ ही पोषण आहार रखने की भी व्यवस्था हो। तो सरकार ऐसी व्यवस्था तो 200 रूपये में कागज पर ही चल सकती है क्योंकि कार्यकर्त्ता कब तक जेब से आंगनवाड़ी संचालित करे? बच्चों की देख-रेख कुपोषण से मुक्ति और शिक्षा के प्रचार प्रसार सहित तमाम योजनाओं में करोड़ो रुपया बहाने वाली शिव सरकार को इधर भी ध्यान देना होगा की, जिम्मेदारों को इतना भी भान नही की 200 रूपये प्रतिमाह में तो बिजली बड़ी मुश्किल से मिलती है जहाँ केंद्र चलाते है। फिर इतनी ही राशि में एक माह तक भवन कैसे मिलें? विज्ञापन और नोटंकी बाजी के लिए हवा में करोडो रुपया फूंक देते हो और यहाँ जमीनी स्तर पर संचालित कार्यक्रम के लिए खाली हाथ दिखाते हो।

*📞…ये जो बोले:-*

कलेक्टर साहब के पास अनुमोदन के लिए भेज दिया है वहाँ से होने के बाद ही हो सकता है मेने मेरा काम कर दिया।
-सुश्री नीलू भट्ट
*जिला कार्यक्रम अधिकारी, धार*

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