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उम्मीद-10…एसडीएम कुक्षी : एसडीएम की दादागिरी व धमकी से जनता भयभीत : गुप्ता पर भी हो शांतिभंग व भय का वातावरण पैदा करने वाली कानूनी कार्यवाही ?

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इंदौर/कुक्षी।अब सच मे लग रहा है कि, कानून की डिग्री (IAS) ओर ऊपर से तापमान की डिग्री दोनों आपस मे टकराने लगी है। जिसका प्रभाव एबीवीपी के छात्रों के साथ ही अब खुद के आशियाने को सदा के लिए अलविदा कहने वाले निसरपुर क्षेत्र की अवाम पर भी टूट पड़ा है। सूर्यदेव का तापमान तो ओर भी, कभी-धूप,कभी-छाव से अनुकूल होकर सहनीय हो जाता है लेकिन अधिकारी के अंदर से आईएएस डिग्री का तापमान है कि, उतरने का नाम ही नही ले रहा। हाल ही में बताया जा रहा निसरपुर डूब क्षेत्र के व्यापारियों की एक बैठक रखी गई थी जहाँ व्यापारियों की सूचि में कोई छूट न जाये या फर्जी न आ जाये इन बिंदुओं पर सुधार करने में व्यापारीयो के थोड़ा लेट पहुँचने व अन्य कारणों से कुक्षी एसडीएम रिशव गुप्ता का पारा इतना चढ़ा की धमकाते हुए जेल भेज दूंगा बोलते हुए धमकी दे डाली। जिससे निसरपुर में बहुत नाराजगी भी है और इस मामले में विरोध प्रदर्शन के भी पूरे आसार है। दूसरा मामला बता दे गणतंत्र दिवस के अवसर पर गुप्ता द्वारा एबीवीपी के छात्रों को तिरंगा यात्रा निकालने पर शांति भंग व भय का वातावरण निर्मित होने का बहाना भिड़ा कर धारा-107 के नोटिस थमा दिए थे। जिसको लेकर दो दिन पूर्व धार में एबीवीपी के द्वारा ज्ञापन देकर एसडीएम रिशव गुप्ता पर राष्ट्र द्रोह का प्रकरण दर्ज करने की मांग के साथ ही यह भी कहा गया कि, चापलूस नेताओ के द्वारा समझौते ओर माफी के लिए दबाव बनाकर धमकाया जा रहा। एबीवीपी नेता ने यह भी कहा कि, जिन्हें नोटिस दिए गए उन छात्रों में कुछ के पालक शासकीय सेवक है इसलिए भी बार-बार प्रताड़ित किया जा रहा। वैसे बता दूं कुक्षी में नेता है ही नही सब नोटंकीबाज है कुछ के नीचे अंधेरा है तो कुछ चापलूस ओर कुछ धंधेबाज। सारी बाते बताने के बाद फिर उम्मीद करता हूँ दुसरो से उम्मीद करने वाले ओर खुद उम्मीद पर खरे न उतरने वाले एसडीएम गुप्ता से की कानून का दुरुपयोग करते हुए तुम शांति भंग व भय का वातावरण पैदा करना बंद करो… इधर खोने के लिए कुछ भी नही…जिस कानून से तुम दुसरो को तड़का रहे हो…थोड़ा बहुत ज्ञान इधर भी लेकर बैठे है कहीं यही कानून उल्टा तुम पर न भारी पड़ जाए…निश्चित रूप से गलती होती है पर अगली बार सुधार भी तो करना चाहिए,अगर होता तो, दसवीं उम्मीद नही करनी पड़ती… बड़ी ही उम्मीद के साथ कहने में आता है कि, तुम्हारे हाथों में जो कानून की किताब है वही मेरे काम भी आने वाली है क्योकि, देश मे बड़े-बड़े न्यायालय है मेरी बात को रखने के लिए… ओके चलते है फिर मिलेंगे नई उम्मीद के साथ…

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